रायपुर (वीएनएस)। डाॅ. आभा रूपेन्द्र पाल ने कहा कि विश्व का प्रथम लिखित संविधान संयुक्त राज्य अमेरिका का...
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श्रीनगर (वीएनएस)। सुरक्षाबलों को निशाना बनाने लगाए गए आईईडी को बरामद कर आतंकियों के मंसूबों को नाकाम कर...
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की।...
वर्धा (वीएनएस)। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में संविधान दिवस (26 नवंबर) के अवसर पर संविधान की उद्देशिका...
नई दिल्ली (वीएनएस)। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले की शनिवार को...
रायपुर- किसी के प्रतिभा को जब भी सराहा गया है, वह दिन उसके लिए सबसे अहम और खुशी का दिन बन जाता है।उस व्यक्ति का नाम, पहचान और प्रतिभा लोगों के जेहन में बस जाती है। और जब उसको प्रोत्साहित किया जाता है तो वह नाम इतिहास में दर्ज हो जाता है।ऐसा ही कुछ होने जा रहा है छत्तीसगढ़ के इतिहास में। ये खुशी का पल आया है प्रदेश की लोक गायिका तीजन बाई और ममता चंद्राकर के लिए।ममता चंद्राकर ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा है कि उनकी और उनके माता पिता की तपस्या पूरी हुई है।उनका सपना साकार हुआ है, जिसके लिए वे बेहत खुश है। इस पुरस्कार का मिलना उनके लिए बहुत ही सौभाग्य की बात है।बता दें ममता चंद्राकर के गीत ‘अरपा पैरी के धार महानदी हे अपार, इंद्रावती ह पखारय तोरे पइयां, जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मइया’ ने बहुत लोकप्रियता हासिल की है। इस गीत को छत्तीसगढ़ के राज्यगीत का दर्जा दिया गया है। दरअसल, राष्ट्रीय संगीत, नृत्य और नाटक अकादमी (संगीत नाटक अकादमी) नई दिल्ली की सामान्य परिषद ने पुरस्कारों की घोषणा कर दी है।देशभर से मिले प्रवृष्टियों में से अलग-अलग श्रेणियों में श्रेष्ठ कलाकारों और संगीत साधकों को इस पुरस्कार के लिए चुना गया है।इनमें छत्तीसगढ़ से लोक संगीत की दो गायिकाओं को शामिल किया गया है।इनमें से पंडवानी की विश्वविख्यात लोक गायिका तीजन बाई को राष्ट्रीय संगीत अकादमी ने संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप के लिए चुना है, वहीं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के लिए ममता चंद्राकर को वर्ष 2019 के लिए नामित किया गया है। बता दें यह पुरस्कार विशेष समारोह में देश के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया गया ।अकादमी फेलो के सम्मान में तीन लाख रुपये की पुरस्कार राशि व अकादमी पुरस्कार में एक ताम्रपत्र एवं एक लाख रुपये की नकद राशि दी गई ।ममता चंद्राकर वर्तमान में खैरागढ़ संगीत कला विश्वविद्यालय की कुलपति हैं व वर्तमान में रायपुर में निवासरत है।उन्हें 2016 में पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं तीजन बाई वर्तमान में भिलाई स्थित गनियारी में निवासरत है।तीजनबाई को पद्मविभूषण से सम्मानित किया जा चुका है। फेलोशिप के लिए देशभर से 10 कलाकारों के नाम शामिल किए गए हैं।डा. तीजन बाई को हाल ही में श्री सत्य साईं शक्ति वुमन आफ एक्सीलेंस अवार्ड-2022 से सम्मानित किया जा चुका है।
संविधान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री का संबोधन लीगल प्रोफेशन में वंचितों की हिस्सेदारी बढ़नी चाहिए:...
रायसेन, 26 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध बौद्ध पर्यटन स्थल सांची में कोरोना काल के...
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