नई दिल्ली/कोच्चि, 17 जनवरी । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को केरल में कोच्चि यात्रा के दौरान...
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नई दिल्ली, 17 जनवरी । भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा बुधवार सुबह नई दिल्ली...
डेस मोइनेस (आयोवा), 17 जनवरी । अमेरिकी प्रांत आयोवा में मिली जीत से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प...
दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी ऐपल (Apple) की तरफ से एक नई डिवाइस विजन प्रो (Apple Vision...
शिवम दुबे के पास केएल राहुल को पीछे छोडऩे का मौका नई दिल्ली । भारत और अफगानिस्तान...
डुनेडिन, 17 जनवरी । फिन एलन (137) के शानदार शतकीय पारी की बदौलत न्यूजीलैंड ने तीसरे टी-20...
नई दिल्ली, 17 जनवरी । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के मूल्य में गिरावट का रुख है।...
नई दिल्ली, 17 जनवरी। घरेलू शेयर बाजार में आज कोहराम मचा हुआ नजर आ रहा है। शुरुआती...
रायपुर। कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह के निर्देश पर नालंदा परिसर के समीप सेंट्रल लाइब्रेरी परिसर में अंधियारा...
कपिल वस्तु के राजकुमार सिद्धार्थ जो आगे चलकर ‘गौतम बुध्द’ हुए और जिन्होंने ‘बौद्ध धर्म’ की स्थपना की, गृह त्यागकर निकले, तो बोध की खोज में काफी भटके | आखिर उनकी हिम्मत टूटने लगी | उनके मन में यह विचार बार-बार उठने लगा कि क्यों न वापस राजमहल चला जाये, और अंत में एक दिन वे कपिलवस्तु की ओर लौट ही पड़े | चलते-चलते राह में उन्हें प्यास लगी | सामने ही एक झील थी | वे उसके किनारे गये, तभी उनकी दृष्टी एक गिलहरी पर पड़ी| गिलहरी कोई दुर्लभ जीव नहीं, किन्तु उस गिलहरी की चेष्टाओं ने सिद्धार्थ का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया | बात यह थी कि वह गिलहरी बार-बार पानी के पास जाती, अपनी पूंछ उसमें डुबोती और उसे निकालकर रेट पर झटक देती | सिद्धार्थ से न रहा गया | वे पूछ ही बैठे, नन्ही गिलहरी, यह क्या कर रही हो तुम? इस झील को सुखा रही हूँ, उसने उत्तर दिया | यह काम तो तुमसे कभी न हो पायेगा,’ सिद्धार्थ बोले, ‘भले ही तुम हजार बरस जियो और करोड़ों-अरबों बार अपनी पूंछ पानी में डुबाकर झटको, किन्तु झील को सुखाना तुम्हारे बस की बात नहीं |’ ‘तुम्हीं ऐसा मानो, मैं नहीं मानती | मैं तो यह जानती हूँ कि मन में जिस कार्य को करने का निश्चय किया, उस पर अटल रहने से वह हो ही जाता है | मैं अपना काम करती रहूंगी|’ और वह अपनी पूंछ डुबोने झील की ओर चल पड़ी | गिलहरी की बात सिद्धार्थ के हृदय में गड़ गयी| उन्हें अपने मन की निर्बलता महसूस हुई | वे वापस लौटे और फिर तप में निरत हो गये|
