नई दिल्ली, 06 मार्च । सरकार की एफडीआई नीति के निरंतर घोर उल्लंघन और अमेजन एवं फ्लिपकार्ट...
Lok Swaraj24
इस्लामाबाद, 06 मार्च । पाकिस्तान में राजनीतिक खींचतान के बीच आतंकी हमले कम होने का नाम नहीं...
लंदन, 6 मार्च । इंग्लैंड के नॉर्थम्प्टन के पास पुरातत्व विभाग को खुदाई में चार हजार साल...
उज्जैन, 06 मार्च। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान पुजारियों ने भगवान संग...
गंगटोक, 06 मार्च। केंद्रीय रेल, संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि...
पटना, 06 मार्च । केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक टीम राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी...
तिरुवनंतपुरम, 06 मार्च। केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के आट्टुकाल भगवती मंदिर में कल (मंगलवार) ‘आट्टुकाल पोंगाला’ का...
जयपुर, 06 मार्च । राजस्थान के सीकर जिले का ऐतिहासिक श्री खाटू श्याम मंदिर होली-धुलंडी और तिलक...
नई दिल्ली, 06 मार्च । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि देश में सभी के...
धान का कटोरा कहे जाने वाले यह छत्तीसगढ़ अपनी विशेषता के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है। आज हम छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित खल्लारी माता के मंदिर के बारे में बात करेंगे। माता का यह मंदिर खल्लारी ग्राम की पहाड़ियों पर बिल्कुल शीर्ष पर स्थित है। यह महासमुंद में दक्षिण की ओर 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। खल्लारी का इतिहास देखा जाए तो आपको बता दें कि जब कलचुरी वंश की एक शाखा रायपुर पर स्थापित की गई थी तब कलचुरी वंश की शुरुआती राजधानी खल्लारी थी। उस समय में खल्लारी का पूरा इलाका मृतकागड़ नाम से जाना जाता था। सन 1409 में ब्रह्मा देव राय के राज में कलचुरी वंश की राजधानी को खल्लारी से रायपुर में बदल दिया गया था। बात करें खल्लारी और रायपुर के बीच की दूरी की तो खल्लारी और रायपुर के बीच लगभग 80 किलोमीटर का फासला है। वैसे तो छत्तीसगढ़ के सभी क्षेत्रों का बखान महाभारत में वर्णित है। ठीक उसी प्रकार महाभारत में इस जगह को खाल्लवतिका के नाम से जाना जाता था। इस जगह का वर्णन महाभारत और रामायण में भी मिलता है इस इस मंदिर के इतिहास में दो कथाएं काफी प्रचलित है पहला भीम और हिडिंबा की ब्याह की और दूसरी कथा है पांडवो की हत्या का षडयंत्र। खल्लारी माता मंदिर का...
