नई दिल्ली, 21 मार्च । दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार का बजट आज (मंगलवार) विधानसभा में पेश नहीं...
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स्वालबर्डी ब्रांड अपने बोतलबंद ठंडे पानी का स्वाद “मुंह में बर्फ (स्नो) के एहसास” जैसा बताता है,...
मुंबई, 20 मार्च । उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस को धमकी देने के मामले में...
इस्लामाबाद, 20 मार्च । इस्लामाबाद पुलिस ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष और मुल्क के पूर्व प्रधानमंत्री...
नई दिल्ली, 20 मार्च। लोकसभा और राज्यसभा में आज (सोमवार) छठे दिन भी कार्यवाही बाधित है। दोनों...
नई दिल्ली, 20 मार्च। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने आज (सोमवार) यहां हैदराबाद...
चंडीगढ़, 20 मार्च । राज्य में इंटरनेट और एसएमएस सेवाएं मंगलवार 21 मार्च तक बंद रहेंगी। खालिस्तान...
अहमदाबाद/गांधीनगर, 20 मार्च। गांधीनगर में राज्य सरकार की ओर से सप्ताह के प्रथम दिवस सोमवार को 20...
भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के कबीरधाम से 18 कि.मी. दूर तथा रायपुर से 125 कि.मी की दुरी में यहाँ कबीरधाम जिले के चौरागाँव में स्थित एक प्राचीन मंदिर है, यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर कृत्रिमतापूर्वक पर्वत शृंखला के बीच स्थित है, यह लगभग 7 से 11 वीं शताब्दी तक की अवधि में बनाया गया था। यहाँ मंदिर में खजुराहो मंदिर की झलक दिखाई देती है, इसलिए इस मंदिर को “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” भी कहा जाता है. यह मंदिर भगवान शिव और भगवान गणेश की छवियों के अलावा, भगवान विष्णु के दस अवतारों की छवियों को भी चित्रित करता है। भोरमदेव मंदिर नागर शैली और जटिल नक्काशीदार चित्र कला का एक शानदार नमूना है जो श्रद्धालुओं के साथ साथ देश भर से इतिहास और कला प्रेमियों को भी आकर्षित करता है। भोरमदेव मंदिर का इतिहास ऐतिहासिक और पुरातात्विक विभाग द्वारा की गयी खोज और यहाँ मिले शिलालेखो के अनुसार भोरमदेव मंदिर का इतिहास 10 वीं से 12 वीं शताब्दी के बीच कलचुरी काल का माना जाता है। भोरमदेव मंदिर के निर्माण का श्रेय नागवंशी वंश के लक्ष्मण देव राय और गोपाल देव को दिया गया है। कहा जाता है कि नागवंशी राजा गोपाल देव ने इस मंदिर को...
मुंबई । बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की अपकमिंग फिल्म ‘वेडात मराठे वीर दौड़ले सात’ के सेट पर बड़ा...
