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नई दिल्ली, 16 फरवरी । विदेशी निर्भरता कम करने और रक्षा में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए...
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मुंबई, 16 फरवरी । राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय (मुंबई) एयरपोर्ट पर 12...
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नई दिल्ली, 16 फरवरी । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय मंच पर जनजातीय संस्कृति को प्रकट करने...
विजया एकादशी हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। विजया एकादशी अपने नामानुसार विजय प्रादन करने वाली है। भयंकर शत्रुओं से जब आप घिरे हों और पराजय सामने खड़ी हो उस विकट स्थिति में विजया नामक एकादशी आपको विजय दिलाने की क्षमता रखता है। विजया एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कहा जाता है। यह एकादशी विजय की प्राप्ति को सशक्त करने में सहायक बनती है। तभी तो प्रभु श्रीराम ने भी इस व्रत को धारण करके अपनी विजय को पूर्ण रूप से प्राप्त किया था। एकादशी व्रत करने से व्यक्ति के शुभ फलों में वृद्धि होती है तथा अशुभता का नाश होता है। विजया एकादशी व्रत करने से साधक व्रत से संबन्धित मनोवांछित फल की प्राप्ति करता है। सभी एकादशी अपने नाम के अनुरूप ही फल देती हैं। विजया एकादशी व्रत एवं पूजन विधि विजया एकादशी के व्रत में भगवान विष्णु के पूजन का विधान हैं। इस उत्तम व्रत की विधि इस प्रकार से हैं फाल्गुन मास की विजया एकादशी का व्रत एक दिन पूर्व यानी दशमी तिथि की रात से ही आरम्भ हो जाता हैं। दशमी की रात से ही मनुष्य को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिये और संयमित आचरण करना चाहिये। विजया एकादशी के दिन प्रात:काल स्नानादि नित्यक्रिया से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजास्थान पर भगवान का ध्यान करके विजया एकादशी के व्रत का संकल्पि लें। पूजास्थान पर एक वेदी का निर्माण करें और उस पर उड़द, मूंग, गेहूं, चना, जौ, चावल और बाजरा रखें। इस व्रत की पूजा में सप्त धान की वेदी या सप्त धान से घट स्थापना की जाती हैं। फिर एक कलश में जल भरकर वेदी पर रखें। उस कलश में आम या अशोक के वृक्ष के 5 पत्ते लगायें। तत्पश्चात् वेदी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। साथ ही भगवान गणेश की प्रतिमा भी स्थापित करें। धूप-दीप जलाकर सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजा करें। उनके सिंदूर लगायें, रोली-चावल से तिलक करें, फल-फूल व दूर्वा चढ़ायें। जनेऊ चढ़ाये और भोग लगायें। तत्पश्चात् भगवान विष्णुर की पूजा करें। उनको पंचामृत से अभिषेक करायें, रोली-चावल से तिलक करें, चंदन लगायें, पीले रंग के फल-फूल अर्पित करें, तुलसी दल चढ़ाये और भोग लगायें। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। इसके बाद विजया एकादशी व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद धूप-दीप से भगवान विष्णु की आरती करें।...
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