रायपुर, 11 मार्च । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नई दिल्ली में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र...
छत्तीसगढ़
धान का कटोरा कहे जाने वाले यह छत्तीसगढ़ अपनी विशेषता के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है। आज हम छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित खल्लारी माता के मंदिर के बारे में बात करेंगे। माता का यह मंदिर खल्लारी ग्राम की पहाड़ियों पर बिल्कुल शीर्ष पर स्थित है। यह महासमुंद में दक्षिण की ओर 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। खल्लारी का इतिहास देखा जाए तो आपको बता दें कि जब कलचुरी वंश की एक शाखा रायपुर पर स्थापित की गई थी तब कलचुरी वंश की शुरुआती राजधानी खल्लारी थी। उस समय में खल्लारी का पूरा इलाका मृतकागड़ नाम से जाना जाता था। सन 1409 में ब्रह्मा देव राय के राज में कलचुरी वंश की राजधानी को खल्लारी से रायपुर में बदल दिया गया था। बात करें खल्लारी और रायपुर के बीच की दूरी की तो खल्लारी और रायपुर के बीच लगभग 80 किलोमीटर का फासला है। वैसे तो छत्तीसगढ़ के सभी क्षेत्रों का बखान महाभारत में वर्णित है। ठीक उसी प्रकार महाभारत में इस जगह को खाल्लवतिका के नाम से जाना जाता था। इस जगह का वर्णन महाभारत और रामायण में भी मिलता है इस इस मंदिर के इतिहास में दो कथाएं काफी प्रचलित है पहला भीम और हिडिंबा की ब्याह की और दूसरी कथा है पांडवो की हत्या का षडयंत्र। खल्लारी माता मंदिर का...
रायपुर , 28 फरवरी (हि.स.)। रायपुर विकास प्राधिकरण ने अब कमल विहार, इन्द्रप्रस्थ रायपुरा और बोरियाखुर्द की...
रायपुर , 28 फ़रवरी (हि.स.)। प्रदेश में परिवहन विभाग द्वारा नई सुविधा ‘तुंहर सरकार तुंहर द्वार’ का...
रायपुर, 20 फरवरी। छत्तीसगढ़ में सोमवार सुबह कांग्रेस नेताओं के घरों में ईडी ने छापेमारी की है।...
छत्तीसगढ़ राज्य के प्राणदायिनी नदी कही जानी वाली महानदी में बनाया गया गंगरेल बांध के एक छोर में माँ अंगारमोती माता विराजित हैं। जहाँ पे प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में अपनी मनोकामना लिए श्रद्धालुगण आते हैं, माँ की चरणों में अपनी मनोकामना अर्पित करते हैं। धमतरी से मात्र 12 km की दुरी पर गंगरेल बांध के पास स्थित है माँ अंगारमोती माता मंदिर है। गंगरेल बांध का जब 1972 में निर्माण कराया जा रहा था, तब धमतरी जिला के 52 गांव इस बांध के अंदर समाहित हो गए। उन्ही में से एक ग्राम-चंवर भी इस बाँध के अंदर आने लगा। जिनमें से एक माँ अंगारमोती माता का मंदिर भी था। ग्राम-चंवर में माताजी की मूर्ति 600 सालों से विराजित था। निर्माणाधीन बांध के अंदर आने के कारण, उनकी प्रतिमा को विधि-विधान के साथ देवी की मूर्ति को पूर्व स्थान से हटाकर गंगरेल बांध के समीप स्थापित किया गया है। महानदी के निकट विशाल चबूतरे में प्राण-प्रतिष्ठा किया गया हैं। दंडकारण्य का प्रवेश द्वार एवं वन...
दंतेवाड़ा, । छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के नेरली कैंप में सीआरपीएफ के 25 जवान फूड प्वाइजनिंग के...
रायपुर । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 13 फरवरी को कोरिया जिले के मुख्यालय बैकुंठपुर और जशपुर जिले के विकासखण्ड...
रायपुर । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप छत्तीसगढ़ में कोदो, कुटकी एवं रागी की फसलों को...
रायपुर । उत्तरी हवा का प्रभाव एक बार फिर से बढ़ने लगा है। इस कारण रात में तापमान...
