लखनऊ, 18 अप्रैल। केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि उत्तर प्रदेश के...
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चंडीगढ़, 18 अप्रैल। हरियाणा में करनाल जिले के तरावड़ी में मंगलवार तड़के करीब 3ः30 बजे शक्ति राइस...
उज्जैन (मप्र), 18 अप्रैल। खगोल शास्त्र कहता है कि सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण आम घटना है,...
मोतिहारी,18अप्रैल।बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में जहरीली शराब पीने से लोगो का मरने का सिलसिला जारी है।सोमवार...
शिमला, 18 अप्रैल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज (मंगलवार) दोपहर राजधानी शिमला के चार दिवसीय दौरे पर पहुंच...
जम्मू, 18 अप्रैल । जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगलवार सुबह 6 बजे से हल्के वाहनों को दोनों...
नई दिल्ली, 17 अप्रैल । भारत सोमवार को वाराणसी में अपनी 100वीं जी-20 बैठक यानी कृषि मुख्य...
हिन्दूस्तान में शिव मंदिरों की भरमार है लेकिन कुछ शिवालय ऐसे भी हैं जिनका इतिहास आज भी रहस्यमय है। ऐसा ही एक शिव मंदिर छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित है, यहां के शिवलिंग की खास बात यह है कि इससे एक दो नहीं बल्कि पूरे एक लाख छिद्र है। मान्यता है कि यहां जो भी अपनी मनोकामना लेकर आता है उसकी मनोकामना पूरी होकर रहती है। सावन मास और महाशिवरात्रि पर्व के समय यहां भक्तों की भीड़ लगी रहती है छत्तीसगढ़ का काशी: यह मंदिर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 120 कि॰मी॰ तथा संस्कारधानी शिवरीनारायण से 3 कि॰मी॰ की दूरी पर बसे ग्राम खरौद जिला- जांजगीर चाम्पा (छ.ग.) में स्थित है। । खरौद छत्तीसगढ़ का प्रमुख कला केंद्र है और इस स्थान पर मोक्ष की प्राप्ति भी होती है इसीलिए इसे छत्तीसगढ़ का काशी भी कहा जाता है। मान्यता अनुसार श्रीराम ने खर और दूषण का यहीं पर वध किया था। इसीलिए इस जगह का नाम खरौद है। कहा जाता हैं कि यहां पूजा करने से ब्रह्महत्या के दोष का भी निवारण हो जाता है। शिवलिंग की पौराणिक कथा : लंकापति रावण का वध वध करने के बाद लक्ष्मणजी ने भगवान राम से ही इस मंदिर की स्थापना करवाई थी। यह भी कहते हैं कि लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में मौजूद शिवलिंग की स्थापना स्वयं लक्ष्मण ने की थी। कथा के अनुसार शिवजी को जल अर्पित करने के लिए लक्ष्मण जी पवित्र स्थानों से जल लेने गए थे, एक बार जब वे आ रहे थे तब उनका स्वास्थ्य खराब हो गया। कहते हैं कि शिवजी ने बीमार होने पर लक्ष्मण जी को सपने में दर्शन दिए और इस शिवलिंग की पूजा करने को कहा। पूजा करने से लक्ष्मणजी स्वस्थ हो गए। तभी से इसका नाम लक्ष्मणेश्वर है। मंदिर के प्राचीन शिलालेख अनुसार आठवीं शताब्दी राजा खड्गदेव ने इस मंदिर के निर्माण में योगदान दिया था। यह भी उल्लेख है कि मंदिर का निर्माण पाण्डु वंश के संस्थापक इंद्रबल के पुत्र ईसानदेव ने करवाया था। लक्षलिंग यह मंदिर अपने आप में बेहद अद्भुत और आश्चर्यों से भरा है। इसकी ख्याति रामेश्वरम शिवलिंग की तरह ही लक्ष्मणेश्वर महादेव के नाम से...
जीवन परिचय राधाकृष्णन भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे (1962- 1967) राष्ट्रपति थे। मद्रास के प्रेसीडेंसी कॉलेज से अध्यापन का कार्य शुरू करने वाले राधाकृष्णन आगे चलकर मैसूर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हुए और फिर देश के कई विश्वविद्यालयों में शिक्षण कार्य किया। 1939 से लेकर 1948 तक वह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बी. एच. यू.) के कुलपति भी रहे। वे एक दर्शनशास्त्री, भारतीय संस्कृति के संवाहक और आस्थावान हिंदू विचारक थे। इस मशहूर शिक्षक के सम्मान में उनका जन्मदिन भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। डा. सर्वपल्ली राधाकृषण जन्म तमीलनाडू के गांव तिरूतनी में एक निर्धन ब्राह्मण परिवार...
नई दिल्ली, 17 अप्रैल। बठिंडा मिलिट्री स्टेशन फायरिंग की जांच में आर्टिलरी यूनिट के गनर देसाई मोहन...
