मुंबई, 06 मई । महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे कद्दावर नेता शरद पवार ने आखिरकार अपने राजनीतिक...
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रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश में सरकारी नौकरी में भर्तियों का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी...
रायपुर, 5 मई । जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र रायपुर द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के स्थानीय शिक्षित...
रायपुर । मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने गुरुवार को मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन की प्राथमिकता की...
गाजीपुर, 29 अप्रैल। गाजीपुर से बसपा सांसद अफजाल अंसारी और माफिया मुख्तार अंसारी पर गैंगस्टर के मामले...
नई दिल्ली, 29 अप्रैल। दिल्ली के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सिविल...
नई दिल्ली/कोटा, 29 अप्रैल । नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा शनिवार सुबह जेईई-मेन, 2023 सेशन-2 का रिजल्ट...
भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के कबीरधाम से 18 कि.मी. दूर तथा रायपुर से 125 कि.मी की दुरी में यहाँ कबीरधाम जिले के चौरागाँव में स्थित एक प्राचीन मंदिर है, यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर कृत्रिमतापूर्वक पर्वत शृंखला के बीच स्थित है, यह लगभग 7 से 11 वीं शताब्दी तक की अवधि में बनाया गया था। यहाँ मंदिर में खजुराहो मंदिर की झलक दिखाई देती है, इसलिए इस मंदिर को “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” भी कहा जाता है. यह मंदिर भगवान शिव और भगवान गणेश की छवियों के अलावा, भगवान विष्णु के दस अवतारों की छवियों को भी चित्रित करता है। भोरमदेव मंदिर नागर शैली और जटिल नक्काशीदार चित्र कला का एक शानदार नमूना है जो श्रद्धालुओं के साथ साथ देश भर से इतिहास और कला प्रेमियों को भी आकर्षित करता है। भोरमदेव मंदिर का इतिहास ऐतिहासिक और पुरातात्विक विभाग द्वारा की गयी खोज और यहाँ मिले शिलालेखो के अनुसार भोरमदेव मंदिर का इतिहास 10 वीं से 12 वीं शताब्दी के बीच कलचुरी काल का माना जाता है। भोरमदेव मंदिर के निर्माण का श्रेय नागवंशी वंश के लक्ष्मण देव राय और गोपाल देव को दिया गया है। कहा जाता है कि नागवंशी राजा गोपाल देव ने इस मंदिर को...
रांची, 14 मार्च। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी झारखंड पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का को...
जयपुर, 14 मार्च। श्री राजपूत करणी सेना के संस्थापक लोकेन्द्र सिंह कालवी का सोमवार देररात स्थानीय सवाई...
