चाय और कॉफी हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गए हैं। जहां पहले लोग इन्हें सिर्फ स्वाद के लिए पीते थे, वहीं आज स्वास्थ्य के लिहाज से इनका सेवन किया जा रहा है। आज हर्बल और ग्रीन-टी के रूप में कई विकल्प बाजार में उपलब्ध हैं। इसके साथ ही ग्रीन कॉफी (Green Coffee) का नाम भी इसी क्रम में जुड़ गया है। बात हो वजन घटने की या फिर अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं की, तो ग्रीन कॉफी एक बेहतर विकल्प हो सकती है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में आप पढ़ेंगे ग्रीन कॉफी के फायदे किस प्रकार शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। ग्रीन कॉफी क्या है? – कॉफी के पौधे से हरे रंग के बीजों को लेकर पहले उन्हें भूना जाता है और फिर पीसकर सामान्य कॉफी बनाई जाती है। इस प्रक्रिया से कॉफी का रंग हरे से बदलकर हल्का या गहरा भूरा हो जाता है और स्वाद भी बढ़ जाता है, लेकिन कॉफी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट जैसे गुणकारी तत्व की मात्रा कम हो जाती है। वहीं, जब कॉफी के बीजों को बिना भुने पीसकर पाउडर बनाया जाता है, तो इसे ग्रीन कॉफी कहते हैं। इसमें कई गुणकारी तत्व मौजूद होते हैं, जो सेहत के लिए अच्छे हो सकते हैं। प्रतिदिन 200 से 480 एमजी तक ग्रीन कॉफी का सेवन किया जा सकता हैं | ग्रीन कॉफी के फायदे – वजनकम करने के लिए ग्रीन कॉफी के फायदे बढ़ता हुआ वजन कई समस्याओं का कारण बन सकता है और लोग इस समस्या को दूर करने के लिए कई प्रकार के उपाय भी करते रहते हैं। कई शोधों में बढ़ते वजन को कम करने के लिए ग्रीन कॉफी के फायदे देखे गए हैं। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफार्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित चूहों पर किए गई एक रिसर्च के अनुसार, ग्रीन कॉफी में एंटीओबेसिटी गुण पाया जाता है। ग्रीन कॉफी के अर्क में पाया जाने वाला एंटीओबेसिटी गुण शरीर में वसा के संचय को कम कर मोटापे और बढ़ते वजन को कम करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, यह एडिपोजेनेसिस (वसा कोशिकाएं) और लिपिड चयापचय को भी नियंत्रित कर सकता है | मधुमेहकी समस्या में फायदेमंद ग्रीन कॉफी का उपयोग मधुमेह की समस्या को कम करने के लिए भी किया जा सकता है। इस विषय पर किए गए शोध में पाया गया कि ग्रीन कॉफी में क्लोरोजेनिक एसिड पाया जाता है। इसमें हाइपोग्लाइसेमिक और एंटीडायबिटिक प्रभाव पाए जाते हैं, जो मधुमेह की समस्या पर सकारात्मक प्रभाव दिखा सकते हैं। शोध में पाया गया कि कॉफी के 3 से 4 कप की दैनिक खपत लगभग 30 प्रतिशत तक टाइप 2 मधुमेह को कम करने में फायदेमंद हो सकती है । बेशक, डायबिटीज में ग्रीन कॉफी फायदेमंद हो सकती है, लेकिन मरीज को डॉक्टर की ओर से दी गई दवा का सेवन जरूर करना चाहिए। साथ ही अपने खान-पान पर खासतौर पर ध्यान देना चाहिए। हृदयके लिए ग्रीन कॉफी बेनिफिट्स हृदय स्वास्थ्य के लिए ग्रीन कॉफी का सेवन भी फायदेमंद हो सकता है। इस विषय से जुड़े एनसीबीआई की वेबसाइट पर एक शोध उपलब्ध है। शोध में पाया गया कि ग्रीन कॉफी में कई घटक पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए विभिन्न प्रकार से फायदेमंद हो सकते हैं। इन्हीं में से एक है क्लोरोजेनिक एसिड। क्लोरोजेनिक एसिड में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं और एंटीऑक्सीडेंट हृदय रोगों से बचाव में कुछ हद तक मददगार हो सकते हैं । हालांकि, हम हृदय रोगों से बचाव के लिए ग्रीन कॉफी की सिफारिश नहीं करते हैं। ऐसी कोई भी गंभीर समस्या होने पर डॉक्टर से परामर्श लेना ही बेहतर होता है। कोलेस्ट्रॉलको नियंत्रित करने के लिए ग्रीन कॉफी के फायदे बढ़ते हुए कोलेस्ट्रॉल की समस्या आज एक आम समस्या हो गई है। ग्रीन कॉफी एक्सट्रेक्ट का उपयोग कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में फायदेमंद हो सकता है। इस शोध को एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है। शोध के अनुसार, ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट कुल कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल-सी के स्तर को कम कर सकता है (8)। हालांकि, ग्रीन कॉफी का कौन-सा गुण कोलेस्ट्रॉल पर प्रभावी रूप से कार्य करता है, इस पर और शोध की आवश्यकता है। एकाग्रताऔर मूड में सुधार याददाश्त और मानसिक सुधार में भी ग्रीन काॅफी फायदेमंद हो सकती है। एक शोध के अनुसार, ग्रीन कॉफी बीन्स में कुछ मात्रा कैफीन की होती है। शोध में पाया गया कि कैफीन, सामान्य तौर पर मूड, ध्यान, स्मृति और सतर्कता को बढ़ाकर मानसिक स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है । इसके अलावा, एक अन्य शोध में पाया गया कि अल्जाइमर के रोगियों पर ग्रीन कॉफी बीन्स का उपयोग फायदेमंद हो सकता है। शोध के अनुसार, इसमें न्यूरोप्रोटेक्टिव गुण पाए जाते हैं, जो अल्जाइमर की समस्या में फायदेमंद हो सकते हैं...
सेहद/स्वाद
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पेक्टोज एंजाइम की उपस्थिति में स्टार्च कार्वोहाइडे्रक में बदलता है। मिठास पैदा करता है। ज्यादा पके फल होने पर पेक्टिन एसिट में बदल जाता है।और जेली के लिए ज्यादा पके फलों का उपयोग न करें।जेली के लिए पेक्टिन 1 प्रतिशत खटास 1 प्रतिशत व शक्कर 68 आवश्यक है।इस तरह से बनाये गए जेली बहुत अच्छे होते है। आज जानते है अमरूद जेली बनाने की विधि: सामग्री- 1 किलो. अमरूद, 1 ली.1/4 पानी, 5 ग्रा. साइट्रिक एसिड, 750 ग्रा. शक्कर, विधि- अमरूद के गोल स्लाइम करें। खुले बर्तन में सवा लीटर पानी, अमरूद के स्लाइम व एक ग्राम साइहट्रक एसिड लेकर उबालें।मध्यम आंच कर 45 मिनट पकायें । छन्नी में पलटकर रस अपने आप छनने दें। 2-3 घंटा छनने के बाद चीनी डालेर पकायें पूरी चीनी घुल जाने पर 4ग्रा. साइट्रिक डालेर एक उबाल लेकर छानें। फिर से आंच पर चढ़ाकर सीट टेस्ट आने तक पकायें।लकड़ी के पाटे में रखी चौड़े मुंह की बोतलों में ऊपर से झाग अलग कर दें। पिघली मोम से सील कर दें। सीट टेस्ट- 1 चम्मच में लेकर 1 मिनट ठण्डा करं फिर गिराने पर वी आकर की चादर बन जाये जो गिरे नही। 2 कांटा जेली में डुबाकर निकालें। 1 मिनट ठण्डा करने पर दांतों के बीच में जेली की पारदर्शक पर्त जम जायेगी।
शहद में सेहत का खजाना होता है. इसके सेवन से कई तरह की समस्याएं दूर हो सकती...
