May 26, 2026

Blog

Spread the love

 पटना, 26 मई । बिहार विधान परिषद की खाली हो रही 10 सीटों के लिए 18 जून को चुनाव कराया जाएगा। केंद्रीय चुनाव आयोग ने मंगलवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई सीट भी शामिल है, जिस पर उपचुनाव कराया जाएगा। यह सीट विधानसभा कोटे से विधान परिषद के लिए भरी जाएगी और निर्वाचित सदस्य का कार्यकाल 6 मई 2030 तक रहेगा।

इसके अलावा बिहार विधान परिषद के नौ सदस्यों का कार्यकाल 28 जून को समाप्त हो रहा है। जिन सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें डॉ. कुमुद वर्मा, प्रो. गुलाम गौस, मोहम्मद फारूक, भीष्म सहनी, भगवान सिंह कुशवाहा, संजय प्रकाश, समीर कुमार सिंह, सम्राट चौधरी और सुनील कुमार सिंह शामिल हैं। हालांकि इनमें से सम्राट चौधरी और भगवान सिंह कुशवाहा की सीट पहले से खाली हैं, क्योंकि दोनों विधानसभा चुनाव में विधायक बन चुके हैं।

चुनाव आयोग ने नीतीश कुमार की रिक्त सीट पर होने वाले उपचुनाव और अन्य नौ सीटों के नियमित चुनाव के लिए अलग-अलग अधिसूचना जारी की है। आयोग के अनुसार, बिहार के साथ-साथ कर्नाटक विधान परिषद की कुछ सीटों के लिए भी चुनाव कराए जाएंगे।

निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 1 जून को अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि 11 जून नाम वापस लेने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। यदि आवश्यक हुआ तो 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान कराया जाएगा। इसके बाद उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिहार विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास 201 विधायकों का समर्थन है। ऐसे में माना जा रहा है कि 10 में से नौ सीटों पर राजग की जीत लगभग तय है, जबकि एक सीट विपक्ष के खाते में जा सकती है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि राजग सभी 10 सीटों पर उम्मीदवार उतारता है, तो राज्यसभा चुनाव की तरह क्रॉस वोटिंग या राजनीतिक “खेल” की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक गलियारों में इस चुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासकर नीतीश कुमार की खाली हुई सीट को लेकर सियासी हलकों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। अब सभी की निगाहें विभिन्न दलों द्वारा उम्मीदवारों की घोषणा पर टिकी हुई हैं।