October 27, 2026

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भारत का ओवरसीज एफडीआई (फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट) सालाना आधार पर 14 प्रतिशत कम होकर 4.34 अरब डॉलर रह गया है, जो कि पिछले साल की समान अवधि में 5.04 अरब डॉलर था। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से सोमवार को जारी किए गए डेटा में दी गई।

इसमें मासिक आधार पर भी गिरावट देखने को मिली है। अगस्त 2026 में यह 6.87 अरब डॉलर था।

ओवरसीज एफडीआई का मतलब, उस निवेश से है, जो भारतीय कंपनी किसी विदेशी देश में कोई व्यावसायिक उद्यम स्थापित करने के लिए करती हैं।

भारतीय कंपनियों की ओर से इक्विटी प्रतिबद्धता सितंबर 2026 में सालाना आधार पर करीब 25 प्रतिशत बढ़कर 3.26 अरब डॉलर हो गई है, जो कि पिछले साल की समान अवधि में 2.59 अरब डॉलर थी।

हालांकि, सितंबर में लोन प्रतिबद्धता और जारी की गई गारंटी में कमी देखने को मिली है।

सितंबर 2026 में भारतीय कंपनियों की लोन प्रतिबद्धताएं सालाना आधार पर घटकर 54.91 करोड़ डॉलर रह गई हैं, जो कि पिछले साल की समान अवधि में 98.11 करोड़ डॉलर थीं। हालांकि, मासिक आधार पर इसमें बढ़ोतरी देखने को मिली है, यह अगस्त 2026 में 47.35 करोड़ डॉलर पर थीं।

वहीं, भारतीय कंपनियों की ओर से जारी की गई गारंटी में सितंबर 2026 में सालाना आधार पर घटकर 52.82 करोड़ डॉलर की रह गई हैं, जो कि पिछले साल की समान अवधि में 1.47 अरब डॉलर थीं। मासिक आधार पर भी इसमें गिरावट देखने को मिली है, यह अगस्त 2026 में 2.29 अरब डॉलर थीं।

इक्विटी आउटफ्लो में सन फार्मा लैबोरेटरीज का 1.99 अरब डॉलर के साथ दबदबा रहा, इसके बाद व्हाइट ओक इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट द्वारा 14.6 करोड़ डॉलर का निवेश और नैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 4.8 करोड़ डॉलर का आउटफ्लो रहा। लोन के मामले में, निर्माण कंपनी हाईवे कंस्ट्रक्शंस द्वारा अपनी यूके सहायक कंपनी को 8 करोड़ डॉलर का हस्तांतरण किया। वहीं, सितंबर में पहारपुर कूलिंग टावर्स ने अपनी सिंगापुर सहायक कंपनी को 10.3 करोड़ डॉलर की गारंटी भी जारी की।