नई दिल्ली, 24 जुलाई । कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को भारत में निर्मित अथवा उत्पादित वस्तुओं के निर्यात के लिए इन्वेंट्री (स्टॉक) रखने की अनुमति देने के निणर्य को एक स्वागतयोग्य और दूरदर्शी कदम बताया है। साथ ही इसका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों को जरूरी भी बताया है।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने शुक्रवार को कहा कि यह दूरदर्शी कदम है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भारत की वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी बढ़ाने, निर्यात तंत्र को सशक्त बनाने, “मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड” अभियान को गति देने तथा भारतीय निर्माताओं, एमएसएमई, कारीगरों और उद्यमियों के लिए नए अवसर सृजित करने के विजन के अनुरूप है। सरकार ने केवल निर्यात के लिए भंडार-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में एफडीआई की अनुमति दी है।
खंडेलवाल ने कहा कि निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य का पूर्ण समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन यह भी उतना ही आवश्यक है कि इस प्रावधान को उसके मूल उद्देश्य और भावना के अनुरूप लागू किया जाए तथा इसका दुरुपयोग घरेलू बी2सी ई-कॉमर्स व्यापार के लिए पिछले दरवाजे के रूप में न हो, क्योंकि वर्तमान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति के तहत विदेशी कंपनियों को घरेलू बी2सी ई-कॉमर्स व्यापार की अनुमति नहीं है। खंडेलवाल ने पारदर्शिता, जवाबदेही और नीति के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:-
खंडेलवाल ने कहा कि निर्यात के उद्देश्य से इन्वेंट्री रखने की अनुमति किसी भी विदेशी कंपनी को ऑटोमैटिक रूट के तहत नहीं दी जानी चाहिए। इसके बजाय उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा कंपनी की व्यवसाय योजना की विस्तृत जांच करने तथा यह बाध्यकारी आश्वासन प्राप्त करने के बाद ही अनुमति दी जानी चाहिए कि इन्वेंट्री का उपयोग केवल निर्यात गतिविधियों के लिए होगा और घरेलू बी2सी व्यापार के लिए नहीं।
विदेशी कंपनियों के स्वामित्व वाली निर्यात इन्वेंट्री को केवल भौतिक रूप से अलग और कस्टम-बॉन्डेड गोदामों में रखा जाना चाहिए, ताकि उसकी पूर्ण ट्रैकिंग सुनिश्चित हो सके और घरेलू बाजार में किसी भी प्रकार के विचलन को रोका जा सके।
डीपीआईआईटी और डीजीएफटी के अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा प्रत्येक तिमाही में निरीक्षण और ऑडिट किया जाना चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन्वेंट्री का उपयोग केवल निर्यात के लिए हो रहा है और उसका कोई हिस्सा घरेलू बी2सी व्यापार में नहीं जा रहा है।
पारदर्शिता और जनविश्वास को बढ़ाने के लिए ऑडिट रिपोर्ट प्रत्येक तिमाही में डीपीआईआईटी तथा संबंधित ई-कॉमर्स कंपनी की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रकाशित की जानी चाहिए।
यदि कोई कंपनी ऑडिट कराने से इनकार करती है, आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराती है अथवा घरेलू बी2सी बिक्री के लिए इन्वेंट्री के दुरुपयोग का कोई प्रमाण मिलता है, तो उसकी अनुमति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जानी चाहिए तथा एफडीआई नीति और अन्य लागू कानूनों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
कैट महामंत्री खंडेलवाल ने कहा कि ये उपाय इस नीति के वास्तविक उद्देश्य, भारत के निर्यात को गति देने को प्राप्त करने में सहायक होंगे, साथ ही देश की एफडीआई नीति की पवित्रता बनाए रखेंगे और घरेलू व्यापार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को भी सुनिश्चित करेंगे।
