August 7, 2026

Blog

Spread the love

कोलकाता, 07 अगस्त । महानायक उत्तम कुमार की जन्मशती के अवसर पर पश्चिम बंगाल सरकार ने वर्षभर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की योजना बनाई है। इस उद्देश्य से राज्य के सूचना एवं संस्कृति विभाग ने एक उच्चस्तरीय सलाहकार समिति का गठन किया है, जो जन्मशती समारोह की रूपरेखा तैयार करेगी। रुद्रनील घोष ने बताया कि इस विषय पर शुक्रवार को एक और छोटी बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।

सरकार का उद्देश्य केवल महानायक को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उनके अभिनय, सिनेमा के प्रति दृष्टिकोण और बंगाली संस्कृति में उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है।

गठित समिति में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ फिल्म जगत की कई प्रमुख हस्तियों को शामिल किया गया है। समिति के मुख्य संरक्षक राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी होंगे, जबकि अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को सह-संरक्षक बनाया गया है। प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक संदीप राय समिति के अध्यक्ष होंगे और अभिनेता प्रसेनजीत चटर्जी कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाएंगे। सूचना एवं संस्कृति विभाग के सचिव सौमित्र मोहन को सदस्य-सचिव बनाया गया है।

इस पहल पर भाजपा विधायक और अभिनेता रुद्रनील घोष ने कहा कि उत्तम कुमार केवल महान अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने बंगाली फिल्म उद्योग को मजबूत आधार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और सूचना एवं संस्कृति विभाग स्वस्थ संवाद के माध्यम से बंगाली सिनेमा के स्वर्णिम दौर जैसा कार्य वातावरण फिर से स्थापित करना चाहते हैं और यह समारोह उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

इससे पहले अभिनेता प्रसेनजीत चटर्जी ने मुख्यमंत्री के साथ बैठक कर जन्मशती समारोह की तैयारियों पर चर्चा की थी। बैठक में इस आयोजन को एक व्यापक सांस्कृतिक अभियान का रूप देने पर विचार किया गया।

समिति में फिल्म जगत की कई प्रमुख हस्तियों को शामिल किया गया है। इनमें अभिनेता देव, जीत, आबीर चटर्जी, जीशु सेनगुप्ता, ऋतुपर्णा सेनगुप्ता, रूपा गांगुली, रुद्रनील घोष और गौरव चटर्जी शामिल हैं। वहीं निर्देशक सृजीत मुखर्जी, कौशिक गांगुली सहित कई अन्य फिल्मकार भी समिति का हिस्सा होंगे।

सरकार के अनुसार समिति का कार्य केवल कार्यक्रमों का आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा। यह समिति उत्तम कुमार के जीवन और कार्यों पर प्रदर्शनी, स्मारिका प्रकाशन, संग्रहालय संरक्षण, शोध कार्य तथा विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों की योजना भी तैयार करेगी। साथ ही राज्य के शैक्षणिक संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों को भी इस वर्षभर चलने वाले समारोह से जोड़ने की योजना है।