पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़े असर के बीच केंद्र सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा, उद्योगों के लिए जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता, व्यापार को बढ़ावा और महंगाई पर नियंत्रण के लिए कई उपाय किए हैं। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में लिखित जवाब में दी।
सरकार ने बताया कि उद्योगों को राहत देने के लिए कुछ पेट्रोकेमिकल कच्चे माल पर अस्थायी सीमा शुल्क (Custom Duty) में छूट दी गई है। इसके अलावा कारोबारियों की मदद के लिए भारत मैरिटाइम इंश्योरेंस पूल राहत (RELIEF – Resilience and Logistics Intervention for Export Facilitation) योजना शुरू की गई है।
निर्यातकों को बढ़ी हुई मालभाड़ा, बीमा और युद्ध जोखिम लागत से राहत देने के लिए RoDTEP (Remission of Duties and Taxes on Exported Products) योजना के लाभ फिर से बहाल किए गए हैं। साथ ही इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) 5.0 के तहत तरलता (Liquidity) सहायता भी उपलब्ध कराई गई है।
सरकार ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) का दायरा बढ़ाकर व्यापार को अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाया जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता, रणनीतिक साझेदारियों का विस्तार, स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व बढ़ाने, वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण योजना जैसे कदम उठाए गए हैं। साथ ही एलपीजी उपभोक्ताओं को पीएनजी अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सरकार ने उर्वरकों और अन्य कृषि इनपुट की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए गैस आपूर्ति, आयात स्रोतों में विविधता, अग्रिम खरीद और बफर स्टॉक बनाए रखने जैसे कदम भी उठाए हैं।
सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी थीं, जिससे भारत का आयात बिल प्रभावित हुआ। हालांकि अप्रैल 2026 में भारतीय कच्चे तेल की औसत कीमत 114.5 डॉलर प्रति बैरल थी, जो 22 जुलाई 2026 तक घटकर 77.6 डॉलर प्रति बैरल रह गई। इससे चालू खाते पर दबाव कम होने और अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया कदमों से पूंजी निवेश बढ़ने और विदेशी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
सरकार का कहना है कि इन सभी उपायों से देश की व्यापक आर्थिक स्थिरता (Macroeconomic Stability) मजबूत होगी, महंगाई पर नियंत्रण रहेगा और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव का असर कम होगा।
सरकार ने बताया कि अप्रैल-जून 2026 के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर औसतन 3.9 प्रतिशत रही। वहीं, RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत और CPI महंगाई दर 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।
सरकार ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर पेट्रोल-डीजल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Special Additional Excise Duty) और कुछ आयातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क में संतुलित बदलाव जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही आर्थिक स्थिरीकरण कोष (Economic Stabilisation Fund) भी बाहरी झटकों से निपटने में मदद करेगा।
