चंडीगढ़, 16 अगस्त संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) की ओर से रविवार को 55 किसानों का जत्था खनौरी बॉर्डर से दिल्ली के लिए रवाना होगा। किसानों की यह ‘किसान बचाओ पैदल यात्रा’ दातासिंघवाला स्थित गुरुद्वारा दातावाला से शुरू होगी। यह जत्था करीब 228 किलोमीटर का सफर तय करके 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचेगा।
इस यात्रा के दौरान किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले शुभकरण सिंह की मौत वाले स्थान की मिट्टी भी अपने साथ दिल्ली लेकर जाएंगे। जंतर-मंतर पर एक दिन की किसान पंचायत आयोजित की जाएगी। इसके बाद किसानों की मांगों से संबंधित मांग पत्र केंद्र सरकार को सौंपने का प्रयास किया जाएगा। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगी। जत्थे में एक किसान मुख्य रूप से पैदल चलेगा, जबकि कुछ अन्य किसान उसके साथ रहकर जरूरी सामान उठाएंगे। रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर पड़ाव किए जाएंगे और जत्था चरणबद्ध तरीके से दिल्ली की ओर आगे बढ़ेगा।
इस बीच खनौरी बॉर्डर पर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। बॉर्डर को सील कर किसानों को रोकने के लिए पांच लेयर की बैरिकेडिंग की गई है। किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए पुलिस और प्रशासन अलर्ट पर हैं।
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि किसान किसी भी तरह के टकराव के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जत्थे में सीमित संख्या में किसान हैं और न ही बड़ी भीड़ या ट्रैक्टर-ट्रॉलियां शामिल हैं। किसान शांतिपूर्ण तरीके से पैदल दिल्ली जाएंगे और सरकार को टकराव का कोई मौका नहीं दिया जाएगा। डल्लेवाल ने कहा कि यदि सरकार शांतिपूर्ण तरीके से पैदल जा रहे किसानों को भी रोकती है तो इससे सरकार का रवैया स्पष्ट हो जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को पहले पैदल दिल्ली जाने की बात कही गई थी और अब किसान पैदल ही यात्रा कर रहे हैं।
किसान नेताओं ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील का भी विरोध किया है। उनका कहना है कि इस समझौते का देश की अर्थव्यवस्था और किसानों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। पैदल यात्रा के माध्यम से किसानों के मुद्दों के साथ इस ट्रेड डील के विरोध की आवाज भी केंद्र सरकार तक पहुंचाई जाएगी। किसान नेताओं के मुताबिक यात्रा का मुख्य उद्देश्य किसान आंदोलन के दौरान शुभकरण सिंह की कुर्बानी को याद करना और किसानों की मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से केंद्र सरकार तक पहुंचाना है।
