जम्मू, 07 अगस्त । जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से चल रही है। जम्मू से आज यात्रियों का एक और जत्था बालटाल बेस कैंप के लिए भेजा गया। इस बीच भक्तों का एक जत्था कड़ी सुरक्षा के बीच रामबन जिले से होते हुए जम्मू लौटा। पुलिस कंट्रोल रूम के अनुसार, 926 यात्रियों वाला 29वां जत्था तड़के 2:59 बजे 42 वाहनों के साथ भगवती नगर यात्री निवास से बालटाल रूट के लिए रवाना हुआ।
इस जत्थे में 693 पुरुष, 178 महिलाएं, 34 साधु और 21 साध्वियां शामिल हैं। इन्हें 210बसों, तीन माध्यम वाहन, 17 छोटे और एक दोपहिया वाहन से भेजा गया है। गांदरबल जिले में बालटाल बेस कैंप की ओर बढ़ने से पहले यात्रा की आवाजाही सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के लिए ट्रैफिक और सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। इस बीच पवित्र गुफा के दर्शन कर 133 यात्रियों का 27वां बालटाल बेस कैंप से जम्मू के लिए रवाना हुआ। इस जत्थे में 110 पुरुष, 21 महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं। यह सभी सात गाड़ियों में हैं। इन गाड़ियों में तीन भारी मोटर वाहन, एक हल्का मोटर वाहन और तीन ट्रक शामिल हैं।
यह हिंदू धर्म की सबसे पवित्र और प्रमुख तीर्थ यात्राओं में से एक है। यह यात्रा हर वर्ष जम्मू-कश्मीर की बर्फीली पहाड़ियों में स्थित भगवान शिव की गुफा (बाबा बर्फानी) के दर्शन के लिए आयोजित की जाती है। यहां हर वर्ष प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग (हिमलिंग) निर्मित होता है। अनंतनाग जिले में अमरनाथ गुफा समुद्र तल से लगभग 3,888 मीटर ऊंचाई पर स्थित है।
इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई है। यह 28 अगस्त (रक्षाबंधन) तक चलेगी। अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए दो मुख्य पारंपरिक रास्ते हैं। इनमें बालटाल का रास्ता सोनमर्ग के पास से शुरू होने वाला छोटा लेकिन बेहद खड़ी चढ़ाई वाला मार्ग है। इसकी दूरी बालटाल से लगभग 14-16 किलोमीटर है। पहलगाम मार्ग पारंपरिक और अधिक सुविधाजनक रास्ता माना जाता है। यह चंदनवाड़ी से शुरू होकर शीशनाग और पंचतरणी जैसे खूबसूरत पड़ावों से गुजरता है। इस मार्ग को पूरा करने में श्रद्धालुओं को तीन से पांच दिन का समय लगता है।
