May 23, 2026

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जालंधर, 22 मई। किसानों की जमीन के फर्जी दस्तावेज बनाकर करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट खड़े करने के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ग्रेटर मोहाली एरिया विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) और भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी (आईसीएचबीएस) के सचिव अजय सहगल को यहां से गिरफ्तार कर लिया।

ईडी ने बताया कि एजेंसी ने यह कार्रवाई पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की है। प्राथमिकी किसानों की शिकायत पर दर्ज हुई थी, जिसमें आरोप था कि उनकी सहमति को फर्जी तरीके से दिखाकर संटेक सिटी परियोजना के लिए सीएलयू हासिल किया गया। जांच में सामने आया कि अजय सहगल ने 15 किसानों की 30.5 एकड़ भूमि के लिए जाली सहमति पत्र तैयार किए, जिनमें किसानों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान फर्जी थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर रियल एस्टेट मेगा परियोजना को मंजूरी मिली।

ईडी ने इससे पहले 7 मई को सोसाइटी और एबीएस टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े आठ ठिकानों पर तलाशी ली थी। तलाशी के दौरान एक कारोबारी के घर से 21 लाख रुपये नकद बरामद हुए, जिन्हें बालकनी से नीचे फेंक दिया गया था।

जांच में खुलासा हुआ कि अजय सहगल ने ला कनेला आवासीय बहुमंजिला परिसर और डिस्ट्रिक्ट 7 वाणिज्यिक परिसर जैसे प्रोजेक्ट भी इन्हीं फर्जी सहमति पत्रों के आधार पर विकसित किए। इन परियोजनाओं की इकाइयां बिना रेरा की मंजूरी के ही बेची गईं और अब तक 200 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री हो चुकी है।

ईडी ने बताया कि सहगल ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए निर्धारित भूखंड जीएमडीए को हस्तांतरित नहीं किए। साथ ही, जांच में यह भी सामने आया कि उच्च न्यायालय में हुई चर्चा के विपरीत केवल आंशिक सीएलयू रद्द किया गया ताकि संटेक सिटी शेष स्टॉक को बेच सके।

ईडी ने कहा कि इस मामले में जीएमडीए और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एजेंसी ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।