Oplus_16908288
भारत और सेशेल्स ने मत्स्य पालन, जलीय कृषि और नीली अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है। इस दिशा में भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने 25 अगस्त को सेशेल्स गणराज्य के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठक की। सेशेल्स के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मत्स्य पालन, कृषि और नीली अर्थव्यवस्था मंत्री वालेस कॉसग्रो ने किया, जबकि भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने किया। बैठक में दोनों देशों ने मौजूदा सहयोग की समीक्षा के साथ नए क्षेत्रों की पहचान की और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग के लिए सहयोग आधारित रोडमैप तैयार करने पर चर्चा की।
हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर
सेशेल्स के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए भारतीय पक्ष ने दोनों देशों के बीच गहरे समुद्री सहयोग को रेखांकित किया। भारत ने मत्स्य पालन, जलीय कृषि, उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों पक्षों ने माना कि हिंद महासागर क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक स्थिरता तथा खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत और सेशेल्स के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है।
आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है नीली अर्थव्यवस्था
बैठक के दौरान दोनों प्रतिनिधिमंडलों ने मत्स्य पालन और व्यापक नीली अर्थव्यवस्था को आर्थिक विकास, ग्रामीण रोजगार सृजन और सतत विकास का महत्वपूर्ण आधार माना। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने देश में मत्स्य उत्पादन के रिकॉर्ड 19.7 मिलियन टन तक पहुंचने और समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यात के 8.46 अरब डॉलर तक पहुंचने की जानकारी दी। भारत ने सतत मत्स्य पालन प्रबंधन, जिम्मेदार मछली पकड़ने के तौर-तरीकों और प्रौद्योगिकी आधारित बुनियादी ढांचे के विकास के लिए जारी पहलों पर भी जानकारी साझा की।
समुद्री जलीय कृषि और टूना मत्स्य पालन पर सहयोग
दोनों देशों के बीच संभावित संयुक्त विकास के लिए कई तकनीकी क्षेत्रों की पहचान की गई। इनमें समुद्री जलीय कृषि, आधुनिक हैचरी की स्थापना, टूना मछली पकड़ने के तरीकों में सुधार, मछली भंडार का आकलन, मछली पकड़ने के बाद की उन्नत तकनीक और समुद्री संरक्षण शामिल हैं। दोनों पक्षों ने लक्षित तकनीकी अध्ययनों, संरचित मत्स्य पालन विस्तार सेवाओं और संस्थागत प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए विशेषज्ञता एवं ज्ञान के आदान-प्रदान की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
मत्स्य क्षेत्र में एआई और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा
बैठक में मत्स्य क्षेत्र में नवाचार और डिजिटल बदलाव को गति देने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने मछली पकड़ने से जुड़े डेटा सिस्टम, निगरानी, नियंत्रण एवं चौकसी (एमसीएस) बुनियादी ढांचे और मछली पकड़ने के बाद के प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी उभरती तकनीकों के इस्तेमाल के लिए ठोस साझेदारी विकसित करने पर चर्चा की। इसके अलावा टूना प्रसंस्करण, उत्पादों के विविधीकरण और टिकाऊ तरीके से मत्स्य अपशिष्ट प्रबंधन के लिए पूरी मूल्य श्रृंखला को विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
वार्षिक कार्य योजना और संयुक्त अनुसंधान पर सहमति
दीर्घकालिक और व्यवस्थित प्रगति सुनिश्चित करने के लिए दोनों पक्षों ने संरचित वार्षिक कार्य योजना तैयार करने की आवश्यकता पर सहमति जताई। इसके साथ ही नियामक तालमेल, संयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान के परिणामों के तेजी से वाणिज्यीकरण, एक-दूसरे की प्रयोगशालाओं तक पहुंच और प्रभावी पायलट परियोजनाओं के संयुक्त विकास पर भी चर्चा हुई।
एमओयू के जरिए सहयोग को आगे बढ़ाने में सेशेल्स की रुचि
सेशेल्स के प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से मत्स्य पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में उन्नत कार्य योजना के साथ द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) के जरिए सहयोग को तेजी से आगे बढ़ाने में रुचि दिखाई। सेशेल्स ने दोनों देशों के प्रशासनिक निकायों, शैक्षणिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच निरंतर संवाद के लिए संस्थागत व्यवस्था स्थापित करने के महत्व पर भी जोर दिया।
तकनीकी आदान-प्रदान और आपसी दौरों को बढ़ावा देने पर जोर
बैठक के समापन पर दोनों पक्षों ने आपसी दौरों, विशेष तकनीकी आदान-प्रदान और राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों के बीच सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। इसका उद्देश्य संस्थागत क्षमता का निर्माण करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करना है। बैठक सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में संपन्न हुई। दोनों देशों ने इस साझा दृष्टिकोण को दोहराया कि द्विपक्षीय कूटनीतिक प्रतिबद्धताओं को ठोस और परिणाम-केंद्रित कार्य योजनाओं में बदलकर भारत और सेशेल्स के लिए दीर्घकालिक समुद्री समृद्धि का मार्ग तैयार किया जाना चाहिए।
