अम्बिकापुर, 26 अगस्त । सरगुजा जिले के सीतापुर ब्लॉक में जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम एरंड नवापारा में करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई ‘डोमनी नाला व्यपवर्तन योजना’ पहली तेज बारिश भी नहीं झेल पाई। ग्राम भुषु के पास डोमनी नाले पर दोनों ओर की नहरों को जोड़ने के लिए बनाया गया विशाल एक्वाडक्ट मूसलाधार बारिश के चलते बुधवार सुबह भरभराकर ढह गया।
पुल का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नाले और आसपास के खेतों में समा गया। गनीमत रही कि हादसे के वक्त खेत में कोई ग्रामीण मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा जानलेवा हादसा टल गया।डोमनी नाला व्यपवर्तन योजना (सिंचाई परियोजना) का निर्माण छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा कराया गया था।इस पूरे प्रोजेक्ट की रूपरेखा, बजट की मंजूरी और निर्माण कार्य की निगरानी जल संसाधन विभाग के स्थानीय प्रभाग (सीतापुर/सरगुजा डिवीजन) के इंजीनियरों की देखरेख में की गई थी। ठेकेदार या जिस निजी एजेंसी को इसके निर्माण का टेंडर दिया गया था, उसकी तकनीकी जांच अब विभाग के रडार पर है।
करीब एक दर्जन गांवों के सैकड़ों किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुँचाने के मकसद से इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव रखी गई थी। नहर के जरिए पानी पहुंचाने के लिए इस एक्वाडक्ट को तैयार किया गया था, लेकिन विभागीय लापरवाही और निर्माण गुणवत्ता की अनदेखी ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया। इससे पहले इनटेकवेल निर्माण के दौरान भी लापरवाही की शिकायतें सामने आई थीं, जिससे योजना पहले ही लड़खड़ा रही थी। अब मुख्य संरचना के टूटने से किसानों को पानी मिलने का इंतजार और लंबा हो गया है।
विभाग ने इस परियोजना के मुख्य ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालने) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही ठेकेदार की अमानत राशि और लंबित भुगतानों पर रोक लगा दी गई है।सरकारी धन के नुकसान की वसूली ठेकेदार और दोषी इंजीनियरों से करने के लिए रिकवरी नोटिस जारी किया जा रहा है। प्रशासन ने इस पूरे मामले की तकनीकी जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है, जो अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
इस मामले पर जल संसाधन विभाग के एसडीओ शुभम गुप्ता का कहना है कि क्षतिग्रस्त हिस्से का नए सिरे से निर्माण कराया जाएगा, ताकि किसानों तक सिंचाई का पानी सुचारू रूप से पहुँचाया जा सके।
