A view of the Motor Oil refinery in Agioi Theodoroi near Corinth, Greece, on March 4, 2026, shows that the conflict involving Iran disrupts global energy markets, sending oil and gas prices surging for consumers and fueling broader inflation. (Photo by Nicolas Koutsokostas/NurPhoto via Getty Images)
सिंगापुर में सोमवार को आयोजित ‘इंडिया एनर्जी शोकेस’ कार्यक्रम में वैश्विक ऊर्जा कंपनियों और निवेशकों ने भारत के तेल एवं गैस क्षेत्र में मौजूद विशाल निवेश संभावनाओं तथा सरकार द्वारा लागू किए जा रहे सुधारों पर गहन चर्चा की।पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल की अध्यक्षता में हुए इस आयोजन में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सिंगापुर में भारत की उप उच्चायुक्त सुधि चौधरी ने ऊर्जा क्षेत्र में भारत-सिंगापुर सहयोग को रेखांकित करते हुए तेल-गैस मूल्य श्रृंखला में दोनों देशों की कंपनियों के बीच और करीबी साझेदारी की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
‘समुद्र मंथन’ मिशन और सुधारों पर फोकस
कार्यक्रम में प्रस्तुतियों के माध्यम से तेल एवं गैस अन्वेषण की बोली प्रक्रिया, भारत में बीपी समूह के अनुभव और आगामी ‘इंडिया एनर्जी वीक 2027’ की विस्तृत जानकारी दी गई। सचिव मित्तल के नेतृत्व में दी गई प्रस्तुति में मूल्य श्रृंखला के हर चरण में बड़े निवेश अवसरों का जिक्र किया गया। इनमें ‘समुद्र मंथन राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण मिशन’ के तहत खोज एवं उत्पादन, ‘मेक इन इंडिया’ के अंतर्गत विनिर्माण, रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल्स, गैस बुनियादी ढांचा और रणनीतिक भंडारण शामिल हैं। यह भी बताया गया कि भारत की ऊर्जा मांग वैश्विक औसत से तीन से चार गुना तेज गति से बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए इक्विटी निवेश, संयुक्त उपक्रम, तकनीकी साझेदारी और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं।
देश की हाइड्रोकार्बन संसाधन क्षमता और अन्वेषण संबंधी सुधारों की दी गई जानकारी
हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) के महानिदेशक श्रीकांत नागुलापल्ली ने देश की हाइड्रोकार्बन संसाधन क्षमता और अन्वेषण संबंधी सुधारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने 31 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण मिशन को मंजूरी दी थी, जिसके तहत वित्त वर्ष 2030-31 तक 8.85 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए जाएंगे। कार्यक्रम में निवेशकों के अनुकूल नियामक व्यवस्था बनाने और घरेलू उत्पादन बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से किए जा रहे सुधारों को प्रमुखता दी गई।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों और भारतीय हितधारकों के बीच निरंतर सहयोग के महत्व पर भी जोर
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों और भारतीय हितधारकों के बीच निरंतर सहयोग के महत्व पर भी जोर दिया गया। पेट्रोलियम मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह शोकेस अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और निवेशकों से जुड़ने, नीतिगत व नियामकीय सुधारों को सामने रखने तथा उभरते निवेश अवसरों को रेखांकित करने का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। कार्यक्रम ने साझेदारी बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और वैश्विक ऊर्जा हितधारकों के साथ सहयोग मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। इसका समापन सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य के लिए निरंतर संवाद जारी रखने के आह्वान के साथ हुआ। संयुक्त सचिव (अन्वेषण) विनोद शेषन ने भी कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया।
