नई दिल्ली, 03 सितंबर । दिल्ली सरकार राजधानी की सड़कों की बार-बार खोदने को समाप्त के लिए मल्टी-यूटिलिटी डक्ट (एमयूडी) विकसित करेगी। इसके तहत विभिन्न आवश्यक सेवाओं के लिए साझा भूमिगत कॉरिडोर बनेंगे, ताकि बिजली केबल, पानी और गैस की लाइनों, फायर-हाइड्रेंट नेटवर्क तथा अन्य आवश्यक यूटिलिटी सेवाओं के लिए इस उपयोग कर सकें। चांदनी चौक में इस पहल को पायलट आधार पर लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को एक विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि मल्टी-यूटिलिटी डक्ट के निर्माण से बार-बार सड़क खोदने और उसकी मरम्मत करने की जरूरत कम हो जाएगी, यातायात में होने वाली बाधाएं कम होंगी, नागरिकों को होने वाली असुविधा घटेगी और सड़कों की संरचनात्मक मजबूती को भी बेहतर ढंग से बनाए रखने में सहायता मिलेगी। सरकार ने यह निर्णय हाल ही में आयोजित कैबिनेट की बैठक में लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के विकास की हमारी सोच केवल आज की जरूरतों तक सीमित नहीं है। हम ऐसी आधारभूत संरचना तैयार करना चाहते हैं, जो भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित, सुव्यवस्थित और टिकाऊ हो। मल्टी-यूटिलिटी डक्ट इसी सोच का हिस्सा है। इससे अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय होगा और दिल्ली में भूमिगत यूटिलिटी नेटवर्क के विकास के लिए एक अधिक व्यवस्थित व्यवस्था तैयार होगी। साझा भूमिगत कॉरिडोर उपलब्ध होने से यूटिलिटी नेटवर्क के रखरखाव और भविष्य में उनके विस्तार का काम भी अधिक आसान और तेज हो सकेगा। साथ ही खुदाई के दौरान यूटिलिटी लाइनों को होने वाले आकस्मिक नुकसान की आशंका कम करने और विभिन्न नागरिक एवं यूटिलिटी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पूरी व्यवस्था के लिए जल्द ही विशेषज्ञों की एक तकनीकी समिति गठित की जाएगी। समिति में डिस्कॉम, दिल्ली जल बोर्ड, लोक निर्माण विभाग आदि विभागों के विशेषज्ञ अधिकारी शामिल होंगे। समिति की निगरानी और अनुशंसा के आधार पर राजधानी के विभिन्न इलाकों में मल्टी-यूटिलिटी डक्ट के निर्माण और विस्तार से संबंधित कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मल्टी-यूटिलिटी डक्ट की तकनीकी डिजाइन में वेंटिलेशन, अग्नि-सुरक्षा, रखरखाव के लिए सुगम पहुंच और आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं को शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विभिन्न यूटिलिटी सेवाओं को एक साझा भूमिगत कॉरिडोर में सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस महत्वपूर्ण पहल को पहले पायलट आधार पर लागू किया जाएगा। इसके लिए चांदनी चौक में एस्प्लेनेड रोड पर 310 मीटर और मोर सराय रोड पर 560 मीटर लंबे हिस्से का चयन प्रस्तावित है। इन पर कार्य जल्द शुरू होने वाला है। इन दोनों पायलट कॉरिडोर से प्राप्त अनुभव के आधार पर दिल्ली के अन्य हिस्सों में मल्टी-यूटिलिटी डक्ट का निर्माण किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट से यह समझने में मदद मिलेगी कि विभिन्न यूटिलिटी सेवाओं को साझा भूमिगत व्यवस्था में किस प्रकार बेहतर ढंग से समायोजित किया जा सकता है और भविष्य में दिल्ली के अलग-अलग इलाकों की जरूरत के अनुसार ऐसी व्यवस्था को कैसे आगे बढ़ाया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मल्टी-यूटिलिटी डक्ट की पहल अलग-अलग एजेंसियों द्वारा अपनी-अपनी जरूरत के अनुसार किए जाने वाले बिखरे हुए भूमिगत कार्यों के बजाय समन्वित शहरी यूटिलिटी प्लानिंग की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है।
