जगदलपुर, 17 सितंबर । छत्तीसगढ़ के बस्तर में आदिवासियों के लिए रोजगार का सपना दिखाकर बाबू सेमरा में खड़ा किया गया ट्राईफूड पार्क आज स्वयं अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहा है। 50 हजार ग्रामीणों को वनोपज आधारित रोजगार देने का दावा करने वाला यह प्रोजेक्ट चार साल बाद भी सिर्फ कागजों और बयानों तक सिमटकर रह गया है। लगभग 6 करोड़ की लागत से ट्राईफ़ूड पार्क बनकर तो तैयार हो गया, लेकिन यहां अब तक वनोपज का एक भी प्रोसेसिंग प्लांट नहीं लग पाया है और ना ही यहां वनोंपज से संबंधित कोई काम शुरू हो पाया है। ऐसे में एक माली, एक कर्मचारी और दो गार्ड के भरोसे यह ट्राईफ़ूड पार्क चल रहा है, रख रखाव के अभाव में करोड़ों रुपये का भवन खराब होता जा रहा है।
चार साल पहले केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने इस ट्राईफ़ूड पार्क का लोकार्पण किया और लोकार्पण के बाद से बस्तर में वनोपज पर निर्भर ग्रामीणों को रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन आलम यह है कि अब तक इस भवन में एक भी प्रोसेसिंग यूनिट नहीं लग पाया है। इतना ही नही केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने ट्राईफ़ूड पार्क के लोकार्पण के साथ ही मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट में उन्होंने ट्राइफेड के आउटलेट का उद्घाटन भी कर दिया था। हालांकि इस फ्लाफ-शाे के पीछे ट्राईफेड बजट नहीं होने की बात कह कर अपना पल्ला झाडकर आगे बढ़ जाते हैं।
ट्राईफ़ूड पार्क में बनने वाली इस यूनिट पर लगभग 06 करोड़ तो यूनिट तैयार करने एवं 50 करोड़ रुपये के खर्च से ट्राईफ़ूड पार्क के विस्तार की केंद्र सरकार की इस योजना के तहत पार्क का संचालन करने के लिए लगभग दाे हजार कर्मचारियों को नियुक्त किया जाना था। इस निर्माणाधीन भवन में प्रशासनिक भवन, प्रोसेसिंग यूनिट, यूटिलिटी और पैकेजिंंग सेंटर बनाये जाने थे। यहां महुआ लड्डू, कैंडी, चाय, इमली कैंडी, सॉस, काजू के उत्पादों के साथ ही 60 प्रकार के वनोपज का कई प्रोडक्ट तैयार किए जाने का सपना दिखाया गया था ।
बस्तर सांसद महेश कश्यप का कहना है कि फूडपार्क का लोकार्पण केंद्र सरकार के द्वारा बस्तर में किया गया था। इस दाैरान छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी, जिसने इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इस प्रोजेक्ट को लेकर केंद्रीय मंत्री से मुलाकात हुई है, जल्द से शुरू करने का प्रयास किया जाएगा। एक बार शुरू होने के बाद फूड प्रोसेस पार्क निरंतर चलेगा।
