नई दिल्ली, 19 सितम्बर । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को एक्स पर एक सुभाषित साझा किया है जिसका अर्थ है- श्रेष्ठ पुरुष का जीवन परोपकार और लोक कल्याण के लिए ही अभीष्ट होता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संस्कृत का श्लोक साझा किया, “स्वाधीनैव समृद्धिर्जनोपजीव्यत्वमुच्छ्रयश्छाया। सत्पुंसो मरुभूरिख जीवनमात्रं समाशास्यम्॥”
जिसका अर्थ है कि स्वाधीन समृद्धि ही वास्तविक वैभव है और दूसरों का आश्रय व आधार बनना ही सच्ची महानता है। जैसे मरुभूमि में छाया और जीवन दुर्लभ वरदान होते हैं, वैसे ही श्रेष्ठ पुरुष का जीवन परोपकार और लोक-कल्याण के लिए ही अभीष्ट होता है।
यह श्लोक संस्कृत के प्रसिद्ध नीति-संग्रह ग्रन्थ ‘सुभाषितरत्नभाण्डागारम्’ में संकलित एक पारंपरिक मुक्तक सुभाषित है।
