कोलकाता, 26 सितंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि स्वयंसेवक का पहला और सर्वोच्च कर्तव्य अपनी मातृभूमि और भारत के लोगों के लिए जीना और आवश्यकता पड़ने पर उनके लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करना है। स्वयंसेवक का जीवन किसी प्रदर्शन या व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि समाज को भीतर से मजबूत करने और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित होता है।
होसबाले शुक्रवार को कोलकाता में आरएसएस के नवनिर्मित कार्यालय ‘केशव स्मृति भवन’ के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संघ के मूल आदर्शों, निस्वार्थ समर्पण और राष्ट्र सेवा की भावना पर विस्तार से प्रकाश डाला। समारोह में संघ के कार्यकर्ता, शुभचिंतक और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
सरकार्यवाह ने कहा कि संघ समाज के लिए कोई अपरिचित संस्था नहीं है, बल्कि यह एक विशाल परिवार है, जिससे समाज का हर वर्ग किसी न किसी रूप में जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य केवल संगठन विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़कर राष्ट्र जीवन को मजबूत करना उसका प्रमुख उद्देश्य है।
होसबाले ने संघ के दो वरिष्ठ दिवंगत प्रचारकों केशव राव दीक्षित और श्यामलाल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जीवन और योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के जलगांव में जन्मे केशव राव ने बंगाल को अपनी कर्मभूमि बनाया और अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा में समर्पित कर दिया।
सरकार्यवाह ने कहा कि ऐसे प्रचारकों ने कभी पद, प्रतिष्ठा या सम्मान की अपेक्षा नहीं की। वे स्वयं को ‘बिना पते के कार्ड’ की तरह राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर देते थे। उनका जीवन आज भी हजारों स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
दत्तात्रेय हासबाले ने संघ की स्थापना और उसकी 100 वर्ष की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि 27 सितंबर 1925 को विजयदशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। उन्होंने कहा कि एक शताब्दी की इस यात्रा में संघ के कार्यकर्ताओं और प्रचारकों ने अनेक प्रकार की परिस्थितियों का सामना किया है।
सरकार्यवाह ने कहा कि स्वयंसेवक के जीवन में सुख-दुख, मान-सम्मान और अपमान सभी परिस्थितियां आती हैं, लेकिन इनसे विचलित हुए बिना संगठन और समाज के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करना ही संघ की कार्यपद्धति का हिस्सा रहा है।
होसबाले ने सुदूर त्रिपुरा में आतंकवादियों द्वारा चार कार्यकर्ताओं की हत्या जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी संघ के कार्यकर्ताओं ने धैर्य और साहस के साथ अपना कार्य जारी रखा। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियां स्वयंसेवकों की राष्ट्र सेवा की भावना को कमजोर नहीं कर सकीं।
होसबाले ने कहा कि संघ में दायित्व से मुक्त होने के बाद भी वरिष्ठ प्रचारक कार्यकर्ताओं से अलग नहीं होते। वे एक बुजुर्ग और परिवार के मुखिया की तरह नए कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करते रहते हैं। उनके अनुभव और जीवन से नई पीढ़ी को दिशा मिलती है।
उन्होंने कहा कि संघ के लिए संगठन केवल कार्यालयों और भवनों से नहीं चलता, बल्कि उसके पीछे वर्षों से अपना जीवन समर्पित करने वाले कार्यकर्ताओं और प्रचारकों की तपस्या होती है। नया भवन भी इसी परंपरा और समर्पण का प्रतीक है।
सरकार्यवाह ने कहा कि समाज के सहयोग से निर्मित केशव स्मृति भवन उन समर्पित कार्यकर्ताओं और प्रचारकों की स्मृति तथा उनके श्रेष्ठ कार्यों का मूर्त रूप है। उन्होंने कहा कि भवन का निर्माण अपने आप में अंतिम उपलब्धि नहीं है। यहां से ऐसे ही समर्पित और राष्ट्र सेवा के लिए प्रतिबद्ध स्वयंसेवकों का निर्माण होना सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
सरकार्यवाह ने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे संघ के मूल आदर्शों को जीवन में उतारते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ संपर्क और सहयोग बढ़ाएं तथा राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को सर्वोपरि रखें।
