PATNA, INDIA - SEPTEMBER 11: People at ATM booths at State Bank of India main baranch during strike of bank employees for demanding implement 5-day work week and others several demands under banner of United Forum of Bank Unions on September 11, 2026 in Patna, India. (Photo by Santosh Kumar/Hindustan Times via Getty Images)
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के बीच हुई बैठक के बाद 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल को स्थगित कर दिया गया है।
यह निर्णय यूएफबीयू द्वारा 27 सितंबर को रात 9:30 बजे आईबीए के साथ हुई बैठक के बाद जारी एक परिपत्र में घोषित किया गया था।
परिपत्र के अनुसार, आईबीए और यूएफबीयू के प्रतिनिधियों वाली एक उच्च स्तरीय समिति का गठन तत्काल किया जाएगा ताकि शेष शनिवारों को अवकाश घोषित करने की मांग पर चर्चा की जा सके और सभी हितधारकों और ग्राहकों को स्वीकार्य विकल्पों का पता लगाया जा सके।
दोनों पक्षों ने स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना पर चर्चा शुरू करने पर भी सहमति जताई। आईबीए, यूनियनों और संगठनों द्वारा उठाई गई आपत्तियों को दूर करने के लिए सरकार को संशोधनों का प्रस्ताव देगा।
8 मार्च, 2024 की कार्यवाही के कार्यवृत्त में उल्लिखित शेष मुद्दों पर भी जल्द से जल्द समाधान निकालने के उद्देश्य से चर्चा की जाएगी।
मौजूदा घटनाक्रमों को देखते हुए, यूएफबीयू ने प्रस्तावित आंदोलन कार्यक्रमों और हड़ताल की कार्रवाई को स्थगित करने पर सहमति जताई है।
यूएफबीयू ने शुक्रवार को तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की थी।
इससे पहले, शिमला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, यूएफबीयू हिमाचल प्रदेश के संयोजक और बैंकर्स यूनाइटेड फोरम ऑफ हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष नरेंद्र शर्मा ने कहा कि सरकार के साथ एक समझौते के तहत लंबित प्रतिबद्धताओं को लेकर यूनियनों को औद्योगिक कार्रवाई का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
शर्मा ने कहा कि शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश घोषित करते हुए पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करना यूनियनों की प्रमुख मांगों में से एक है। उन्होंने नई प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन योजना पर भी चिंता व्यक्त की, जिसे उन्होंने वित्तीय सेवा विभाग द्वारा एकतरफा रूप से लागू किया जाना बताया।
उन्होंने कहा कि यूनियनें ढाई साल से अधिक समय से समझौते में किए गए वादों को लागू करने की मांग कर रही हैं।
शर्मा ने यह भी कहा कि बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का इरादा ग्राहकों को असुविधा पहुंचाने का नहीं था और उन्होंने निर्बाध बैंकिंग सेवाओं के महत्व को स्वीकार किया।
