New Delhi, Oct 28 (ANI): Union Minister for Railways, Information & Broadcasting, and Electronics & Information Technology, Ashwini Vaishnaw during the Cabinet Briefing, in New Delhi on Tuesday. (ANI Video Grab)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली को मजबूत करने और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी को सुविधाजनक बनाने के लिए पीएम-धारा (पीएम-डेवलपिंग हार्मोनाइज्ड एंड एक्सीलरेटेड रिन्यूएबल-एनर्जी एक्सेस) योजना को मंजूरी दे दी है।
इस योजना में नवीकरणीय ऊर्जा विकासकर्ता या उत्पादक छोरों पर, या ग्रिड लचीलेपन के लिए महत्वपूर्ण अन्य स्थानों पर 50 गीगावाट घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएस) की तैनाती का भी प्रावधान है।
BESS क्षमता का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा की अनिश्चितता, पारेषण अवरोध और व्यस्त समय में बिजली कटौती से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करना है, साथ ही गैर-सौर ऊर्जा उपयोग के घंटों के दौरान बिजली की मांग को पूरा करने में सहायता करना है। इस योजना से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर बेहतर ग्रिड एकीकरण और बिजली वितरण में सुविधा होने की उम्मीद है।
इस योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए कुल परियोजना परिव्यय ₹1,86,405 करोड़ है। इसमें से ₹1,36,378 करोड़ ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III के तहत अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणालियों के विकास के लिए निर्धारित किए गए हैं, जबकि ₹50,000 करोड़ 50 गीगावॉट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए आवंटित किए गए हैं।
इस योजना में केंद्र सरकार की ओर से कुल ₹54,082 करोड़ की वित्तीय सहायता शामिल है। यह केंद्रीय वित्तीय सहायता अंतर-राज्यीय पारेषण शुल्क को कम करने में सहायक होगी, जिससे बिजली की लागत कम रहेगी और अंततः बिजली उपभोक्ताओं को लाभ होगा।
अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली घटक के अंतर्गत सभी ग्रीनफील्ड परियोजनाएं टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) के माध्यम से कार्यान्वित की जाएंगी, जबकि ब्राउनफील्ड उन्नयन और नेटवर्क सुदृढ़ीकरण कार्य लागत-प्लस आधार (सीपीबी) पर किए जाएंगे।
राज्य की ट्रांसमिशन यूटिलिटीज समग्र कार्यान्वयन एजेंसियों के रूप में कार्य करेंगी। ट्रांसमिशन सेवा प्रदाता बिल्ड-ओन-ऑपरेट-मेंटेन (बीओओएम) मॉडल के माध्यम से टीबीसीबी तंत्र के अंतर्गत परियोजनाओं में भाग लेंगे।
पीएम-धारा योजना का उद्देश्य 2035 तक भारत के 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा उत्पादन क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहयोग करना भी है। इससे दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा में योगदान मिलने और देश के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद करके पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इस योजना से बिजली, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। बीईएस के विनिर्माण और तैनाती के विस्तार से घरेलू ऊर्जा भंडारण उद्योग में भी रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जबकि संचालन, रखरखाव और ग्रिड प्रबंधन से भागीदार राज्यों में दीर्घकालिक कुशल रोजगार सृजित होंगे।
