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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि हिंदी को बढ़ावा देने का सबसे प्रभावी तरीका इसे थोपना नहीं, बल्कि इसके इस्तेमाल के लिए अधिक अवसर और भागीदारी पैदा करना है। उन्होंने कहा कि जब हिंदी का ज्ञान रोजगार और पेशेवर तरक्की के अवसरों से जुड़ेगा, तो इसके इस्तेमाल को लेकर लोगों में स्वाभाविक रुचि बढ़ेगी। वह कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की तीसरी बैठक को संबोधित कर रहे थे।
सरल और सहज हो सरकारी हिंदी
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकारी कामकाज में इस्तेमाल होने वाली हिंदी सरल, सहज और आम लोगों की रोजमर्रा की भाषा के करीब होनी चाहिए। अनावश्यक रूप से कठिन या अत्यधिक औपचारिक हिंदी का इस्तेमाल सरकारी संचार को जटिल बना सकता है। उन्होंने कहा कि सरकारी हिंदी ऐसी होनी चाहिए जिसे लोग आसानी से समझ सकें और वह अंग्रेजी के शाब्दिक अनुवाद जैसी प्रतीत न हो।
हिंदी का इस्तेमाल बढ़ा, दक्षिण भारत में भी बढ़ी रुचि
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यभार संभालने के बाद पिछले 10-12 वर्षों में हिंदी के इस्तेमाल में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के अधिकारी भी बड़े पैमाने पर हिंदी का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों में काम करने वाले ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों का उदाहरण दिया, जो गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों में तैनात होने के बावजूद आधिकारिक कार्यों में हिंदी का व्यापक इस्तेमाल कर रहे हैं।
थोपने की बजाय अवसर पैदा करने पर जोर
जितेंद्र सिंह ने कहा कि किसी भाषा के प्रति रुचि पैदा करना उसे थोपने से कहीं अधिक प्रभावी है। यदि हिंदी रोजगार और पेशेवर अवसरों के लिए उपयोगी बनेगी, तो लोग इसे सीखने और इस्तेमाल करने के लिए स्वाभाविक रूप से प्रेरित होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में भी हिंदी सीखने की मांग बढ़ रही है, जहां पहले इसका इस्तेमाल सीमित था।
गैर-हिंदी भाषी राज्यों के साथ संवाद में व्यावहारिकता जरूरी
उन्होंने कहा कि विभाग में पहले से ही काफी काम हिंदी में हो रहा है, लेकिन हिंदी का 100% इस्तेमाल हर परिस्थिति में अनिवार्य करना व्यावहारिक नहीं हो सकता। खासतौर पर गैर-हिंदी भाषी राज्यों के साथ आधिकारिक संवाद में अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों के लोगों और अधिकारियों की सुविधा तथा संवेदनशीलता का ध्यान रखना जरूरी है।
टेक्नोलॉजी और एआई से अनुवाद में सुधार
केंद्रीय मंत्री ने सरकारी कामकाज में हिंदी अनुवाद की गुणवत्ता में हुए सुधार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले अनुवाद में कई बार गलतियां और भ्रामक अर्थ सामने आते थे, लेकिन अब ऐसी समस्याओं में काफी कमी आई है। टेक्नोलॉजी, एआई आधारित प्रणालियों और बड़े डेटासेट की उपलब्धता से तकनीकी एवं संवेदनशील विषयों के अनुवाद की गुणवत्ता में लगातार सुधार हो रहा है।
ज्ञान और भाषा के बीच संतुलन जरूरी
जितेंद्र सिंह ने कहा कि हिंदी के इस्तेमाल को ज्ञान और पेशेवर दक्षता की व्यापक जरूरतों से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। विशेष क्षेत्रों में जहां पर्याप्त हिंदी साहित्य या तकनीकी शब्दावली उपलब्ध नहीं है, वहां केवल भाषा पर जोर देना ज्ञान हासिल करने में बाधा बन सकता है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर मूल तकनीकी शब्दों को बरकरार रखते हुए उनकी व्याख्या और शिक्षण हिंदी में किया जा सकता है।
प्रतियोगिताओं में भाषा विकल्प बढ़ाने का सुझाव
मंत्री ने कौशल विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित प्रतियोगिताओं में भाषा विकल्पों से जुड़े सुझाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भाषा के अधिक विकल्प छोटे कस्बों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के लाभार्थियों के लिए ऐसी पहलों को अधिक सुलभ बना सकते हैं। उन्होंने उपयुक्त मौखिक घटकों को शामिल करने के साथ भाषा विकल्प बढ़ाने के सुझाव को संबंधित मंत्रालय के पास भेजने की बात कही।
हिंदी शिक्षण कार्यक्रमों में समिति की भागीदारी
डॉ. जितेंद्र सिंह ने विद्यालयों में हिंदी शिक्षण कार्यक्रमों में हिंदी सलाहकार समिति के सदस्यों को शामिल करने के सुझाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रस्ताव शिक्षा मंत्रालय के समक्ष रखे जा सकते हैं, खासकर उन कार्यक्रमों में जिनमें शिक्षक और शिक्षण संस्थान शामिल हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्मिक विभाग अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर आने वाले ऐसे कार्यों को स्वयं संचालित नहीं कर सकता।
समिति के सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगा विभाग
मंत्री ने कहा कि हिंदी सलाहकार समिति के सदस्यों से प्राप्त सुझावों पर विभाग ने ध्यान दिया है और उनके कार्यान्वयन के लिए गंभीरता से प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो सुझाव विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर होंगे, उन्हें संबंधित मंत्रालयों और विभागों को भेजा जाएगा, ताकि उचित स्तर पर उन पर विचार किया जा सके।
‘कौशल पत्रिका’ का शुभारंभ
बैठक के दौरान कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ‘कौशल पत्रिका’ का भी शुभारंभ किया गया। जितेंद्र सिंह ने हिंदी सलाहकार समिति की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सदस्यों से लिखित या अन्य उपयुक्त माध्यमों से अपने सुझाव देते रहने का आग्रह किया।
भाषाई विविधता के अनुरूप हो हिंदी का विस्तार
जितेंद्र सिंह ने कहा कि व्यापक उद्देश्य हिंदी को सरल, स्वाभाविक और समावेशी तरीके से बढ़ावा देना होना चाहिए। हिंदी के प्रयोग और प्रसार को बढ़ाते हुए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भाषा को लेकर किसी तरह का थोपा हुआ भाव पैदा न हो। उन्होंने कहा कि हिंदी का विस्तार देश की भाषाई विविधता और रोजमर्रा की संचार आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए।
हिंदी सलाहकार समिति की बैठक
बैठक में हिंदी सलाहकार समिति के सदस्यों ने सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रचार-प्रसार और व्यापक उपयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने सुझाव दिए। विभाग ने इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करने और अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों पर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
