नई दिल्ली, 30 अक्टूबर । दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित युवा संगम के सातवें चरण के तहत हरियाणा और पंजाब की सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया गया। शिक्षा मंत्रालय की ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के अंतर्गत आयोजित सात दिवसीय कार्यक्रम में तमिलनाडु से आए 55 सदस्यीय युवा दल को दिल्ली की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक विरासत और परंपराओं से परिचित कराया जा रहा है।
कार्यक्रम के चौथे दिन दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित सांस्कृतिक समारोह में श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज और अदिति महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने पंजाब के पारंपरिक लोकनृत्य गिद्दा सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने हरियाणा और पंजाब की सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया। कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्ययनरत तमिलनाडु के विद्यार्थियों ने भी अपने पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए। इससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान के इस आयोजन में दक्षिण और उत्तर भारत की लोक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला।
गांधी भवन के निदेशक और युवा संगम के नोडल अधिकारी प्रो. केपी सिंह ने तमिलनाडु से आए विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि वे किसी अलग स्थान पर नहीं आए हैं, बल्कि भारत के एक सुंदर हिस्से से दूसरे हिस्से में आए हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में भाषाएं और अभिव्यक्तियां भले ही अलग हों, लेकिन देश और उसके लोग एक हैं। यही भारत की खूबसूरती है।
उन्होंने तमिलनाडु के देश की संस्कृति में योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि तमिल भाषा विश्व की प्राचीनतम भाषाओं में शामिल है और इसमें समृद्ध साहित्य, शास्त्रीय संगीत, भक्ति तथा विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराएं विद्यमान हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से दिल्ली प्रवास के दौरान कम से कम पांच पक्के मित्र बनाने और उनके साथ संपर्क बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने देश से प्रेम करे, उसे गहराई से जाने और उसके विकास में योगदान दे। युवा संगम महज एक यात्रा नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों को भाषाई और सांस्कृतिक रूप से जोड़ने का महत्वपूर्ण अभियान है।
गांधी भवन के संयुक्त निदेशक प्रो. हंसराज सुमन ने कहा कि युवा संगम केवल एक यात्रा नहीं बल्कि भारत को जीने का अनुभव है। जब हरियाणा का युवा तमिलनाडु की भाषा सीखेगा और पूर्वोत्तर का युवा दिल्ली की विरासत को जानेगा, तभी एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना साकार होगी। उन्होंने कहा कि भारत की साझा संस्कृति हर राज्य में मौजूद है और इसकी विशेषता है कि इसमें हर कोई सहज रूप से रच-बस जाता है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने हरियाणा और पंजाब की एकता का परिचय दिया। वहीं, तमिलनाडु से आए विद्यार्थियों और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने एक-दूसरे की संस्कृति से बहुत कुछ सीखा है।
इस दौरान तमिलनाडु के विद्यार्थियों को दिल्ली के प्रमुख ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व के स्थलों का भी भ्रमण कराया गया। दल ने लाल किला, कुतुब मीनार, राष्ट्रीय संग्रहालय और इंडिया गेट सहित विभिन्न स्थलों का दौरा किया। इसके अलावा दिल्ली हाट, दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज और अन्य स्थानों पर भी विद्यार्थियों को ले जाया गया। कार्यक्रम के तहत खाद्य महोत्सव, हस्तकला प्रदर्शनी, भाषा संगम और ‘मेरी संस्कृति, मेरा गौरव’ विषय पर युवा संवाद का आयोजन भी किया गया।
इस सात दिवसीय आवासीय कार्यक्रम में केंद्रीय विश्वविद्यालय, तमिलनाडु के 55 युवा प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से गठित टीम के शिक्षक इन विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। कार्यक्रम में प्रो. चारू कालरा, प्रो. मनोज कुमार कैन, डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, डॉ. अनिरुद्ध कुमार सुधांशु, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. आलोक कुमार, डॉ. अनवर जहां, डॉ. अनंथि वासुदेवन, डॉ. बसंता वी. गौरी सहित विभिन्न कॉलेजों और विभागों के शिक्षक उपस्थित रहे।
