नई दिल्ली, 12 मई । केन्द्र सरकार कारागार अधिनियम में संशोधन कर ‘आदर्श कारागार अधिनियम, 2023’ को अंतिम रूप देने जा रही है। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
मंत्रालय के अनुसार वर्तमान ‘कारागार अधिनियम, 1894’ आजादी पूर्व का अधिनियम है। यह लगभग 130 वर्ष पुराना है। यह अधिनियम मुख्य रूप से अपराधियों को हिरासत में रखने और जेलों में अनुशासन और व्यवस्था लागू करने पर केंद्रित है और इसमें कैदियों के सुधार और पुनर्वास का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में केन्द्र सरकार कैदियों के सुधार और पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए ‘आदर्श कारागार अधिनियम, 2023’ को अंतिम रूप देने में जुटी है।
गृह मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा अधिनियम में सुधारोन्मुखी प्रावधानों के अभाव के अलावा, आधुनिक समय की जरूरतों और जेल प्रबंधन की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिनियम को संशोधित और अपग्रेड करने की आवश्यकता महसूस की गई। ऐसे में गृह मंत्रालय ने कारागार अधिनियम, 1894 के संशोधन का ज़िम्मा पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो (बीपीआर एंड डी) को सौंपा और ब्यूरो ने राज्य कारागार प्रशासन, सुधार विशेषज्ञों आदि से विस्तृत विचार विमर्श के बाद इसका एक प्रारूप तैयार किया है।
उल्लेखनीय है कि गृह मंत्रालय ने ‘कारागार अधिनियम, 1894’, ‘कैदी अधिनियम, 1900’ और ‘कैदियों का स्थानांतरण अधिनियम, 1950’ की भी समीक्षा की है। इसके बाद इन अधिनियमों के प्रासंगिक प्रावधानों को ‘आदर्श कारागार अधिनियम, 2023’ में शामिल किया है। राज्य सरकारें और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन ‘आदर्श कारागार अधिनियम, 2023’ में अपनी जरूरत के अनुसार संशोधन करके इसे अपने यहां लागू कर सकते हैं और मौजूदा तीन अधिनियमों को निरस्त कर सकते हैं।
नए मॉडल कारागार अधिनियम की प्रमुख विशेषताएं
-सुरक्षा मूल्यांकन और कैदियों को अलग-अलग रखने, वैयक्तिक सजा योजना बनाने के लिए प्रावधान।
-शिकायत निवारण, कारागार विकास बोर्ड, बंदियों के प्रति व्यवहार में परिवर्तन।
-महिला कैदियों, ट्रांसजेंडर आदि को अलग रखने का प्रावधान।
-कारागार प्रशासन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से प्रौद्योगिकी के उपयोग का प्रावधान।
-अदालतों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, जेलों में वैज्ञानिक और तकनीकी पहल आदि का प्रावधान।
-जेलों में प्रतिबंधित वस्तुओं जैसे मोबाइल फोन आदि का प्रयोग करने वाले बंदियों एवं जेल कर्मचारियों के लिए दण्ड का प्रावधान।
-उच्च सुरक्षा जेल, ओपन जेल (ओपन और सेमी ओपन), आदि की स्थापना एवं प्रबंधन के संबंध में प्रावधान।
-खूंखार और आदतन अपराधियों की आपराधिक गतिविधियों से समाज को बचाने का प्रावधान।
-कैदियों को कानूनी सहायता प्रदान करने, अच्छे आचरण को बढ़ावा देने के लिए पैरोल, फर्लो और समय से पहले रिहाई आदि के लिए प्रावधान।
-कैदियों के व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास और उन्हें समाज से दोबारा जोड़ने पर बल देना।
