मुंबई, राज्य ब्यूरो। अजीत पवार सहित राकांपा के नौ मंत्रियों के शिंदे-फडणवीस सरकार में शामिल होने के 10 दिन बाद भी विभाग बंटवारे का पेच उलझा हुआ है। बुधवार शाम इसे सुलझाने के लिए अजीत दिल्ली रवाना हो गए हैं। देर रात तक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एवं उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के भी दिल्ली जाने की चर्चा है।
एकनाथ शिंदे गुट में देखी जा रही नराजगी
अजीत पवार सहित राकांपा के आठ नेता दो जुलाई को शिंदे-फडणवीस सरकार में मंत्री बने थे। इस शपथ ग्रहण के बाद से ही एकनाथ शिंदे गुट में नराजगी देखी जा रही है।
शिंदे गुट और भाजपा किस बात पर समझौता करने को तैयार नहीं?
शिंदे गुट किसी कीमत पर अजीत पवार को वित्त मंत्री बनते नहीं देखना चाहता। इसके अलावा सहकार एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय को लेकर भी सरकार उलझन में है। अजीत पवार ये दोनों मंत्रालय भी राकांपा गुट के लिए चाहते हैं। जबकि, शिंदे गुट और भाजपा इस पर भी समझौता करने को तैयार नहीं है, क्योंकि महाराष्ट्र में सहकार एवं ग्रामीण विकास किसी भी पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण मंत्रालय माने जाते हैं।
बंटवारे पर कई-कई घंटे चर्चा
पिछले तीन दिनों से तीनों पार्टियों के बीच विभाग बंटवारे पर कई-कई घंटे चर्चा हो रही है। इसके अलावा शिंदे गुट के कुछ और विधायक मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी आवाज उठा रहे हैं। शिंदे के खास समझे जाने वाले भरत गोगावले खुलकर कह रहे हैं कि सरकार में राकांपा के शामिल होने के बाद उनके ही हिस्से की रोटी में कटौती हुई है।
तटकरे और गोगावले का टकराव काफी पुराना
गोगावले उसी क्षेत्र से आते हैं, जहां से राकांपा की युवा नेता अदिति तटकरे को मंत्री बनाया गया है। अदिति तटकरे राकांपा अजीत गुट के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे की पुत्री हैं। तटकरे और गोगावले का टकराव काफी पुराना है। अब दोनों एक ही सरकार का हिस्सा हैं। लेकिन, क्षेत्र में वर्चस्व की लड़ाई कायम है।सरकार के अंदर विभाग बंटवारे को लेकर चल रही इस रस्साकसी पर विपक्ष भी मजे ले रहा है।
जल्द होगी नेताओं की बैठक
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का सुझाव दे दिया है। शिंदे गुट के साथ आए निर्दलीय विधायक बच्चू कड़ू ने भी कहा है कि तीनों दलों में यदि बात नहीं बनी तो सरकार गिर सकती है। इन चर्चाओं के बीच बुधवार रात मुख्यमंत्री शिंदे एवं उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली पहुंचने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ तीनों नेताओं की बैठक होगी। जिसमें मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर मंत्रियों के विभाग बंटवारे तक पर फैसला होगा।
मंत्रिमंडल विस्तार कर विभागों का भी किया जाएगा बंटवारा
इसके तुरंत बाद 17 जुलाई को विधानमंडल का वर्षाकालीन सत्र शुरू होने के पहले ही मंत्रिमंडल विस्तार कर विभागों का भी बंटवारा कर दिया जाएगा। ताकि सरकार को विपक्ष के तीखे हमलों का सामना न करना पड़े। यही नहीं, प्रफुल पटेल और हसन मुश्रिफ भी अजीत पवार के साथ दिल्ली गए हैं।
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