बिलासपुर । शिक्षक भर्ती मामले को लेकर हाई कोर्ट ने निर्देश दिए हैं। दरअसल उच्च न्यायालय में वेद प्रकाश सहित अन्य 4 प्रकरणों में सुनवाई हुई, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने शिक्षक, सहायक शिक्षक एवं व्याख्याताओं के करीब 14000 पदों की नियुक्ति राज्य शासन द्वारा किये जाने पर चुनौती दी थी। जिसमें याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राज्य शासन द्वारा विषयवार पद विज्ञापित नहीं किये गये जो कि नियमों के विपरीत है। साथ ही साथ अतिथि शिक्षको को 10 प्रतिशत बोनरा अंक दिया जाना नियम के विरुद्ध है। पिछले सुनवाई मे उच्च न्यायालय द्वारा सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया था कि नियुक्ति प्रक्रिया राज्य शासन जारी रख सकती है, लेकिन नियुक्ति आदेश को अंतिम बिना उच्च न्यायालय की अनुमति के न किया जाये। प्रकरण की सुनवाई 14 अगस्त को रखी गई थी। लेकिन हाई कोर्ट में राज्य सरकार ने शीघ्र सुनवाई का आवेदन पत्र लगया, जिस पर शीघ्र सुनवाई और स्थगन को हटाये जाने की मांग की गई।
हाई कोर्ट ने 13 जुलाई को इस मामले की सुनवाई की, जिसमें महाधिवक्ता सतीश चन्द्र वर्मा और उप महाधिवक्ता संदीप दुबे ने उच्च न्यायालय को बताया कि राज्य सरकार द्वारा करीब 14000 शिक्षको की भर्ती के लिए 4 मई को विज्ञापन निकाला गया था। उसी दिन भर्ती नियम में संशोधन कर सहायक शिक्षको एवं शिक्षकों के लिए विषयवार के स्थान पर सभी विषयों के उम्मीदवार चयन हेतु नियम में संशोधन किया गया। साथ ही साथ मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में केबिनेट में निर्णय लिया गया कि 10 फीसदी अंक अतिथि शिक्षको को बोनस के रूप में दिया जावेगा। महाधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि याचिका में पूर्ण स्थगन होने से राज्य सरकार परिणाम निकलने के बाद आगे की कार्यवाही नही कर पा रही है। जबकि राज्य सरकार द्वारा नियमों में संशोधन करने के पश्चात् ही विज्ञापित पदों पर भर्ती आरंभ की गई थी, जिसका परीक्षा परिणाम भी आ चुका है। प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए स्थगन आदेश को हटाया जाना उचित होगा।
हाई कोर्ट की एकलपीठ के न्यायाधीश पी.सैम कोशी ने सुनवाई के पश्चात् राज्य सरकार को नियुक्ति जारी रखने का आदेश दिया और 5 पद अभ्यर्थियों के लिए सुरक्षित रखने का आदेश दिया जिससे शिक्षको की भर्ती शीघ्र की जा सके।
