दिल्ली :- सियाचिन की दुर्गम पहाड़ी हो या लद्दाख रेंज की ऊंची चोटियां, अब सैनिकों के पास ड्रोन के जरिए आसानी से दवा से लेकर हथियार, दवाएं व अन्य संसाधन पहुंच सकेंगे। यह अनूठा तवस ड्रोन अंतरराष्ट्रीय पुलिस एक्सपो 2023 में प्रदर्शित किया गया है। दर्शकों के बीच यह आकर्षण का केंद्र बना है। ड्रोन को देखने व इसकी जानकारी लेने के लिए दर्शक बेताब दिखे। इसे उत्तर प्रदेश की स्वदेशी ड्रोन निर्माता कंपनी ने तैयार किया है। यह फाइबर से बना है और इसका कुल भार तीन किलो है। यह आसानी से 20 हजार फीट ऊंचाई तक उड़ सकता है। खास बात यह है कि यह ऊंची पहाड़ियों में अपने से तीन गुना वजन को ले जा सकता है। यही नहीं माइनस 30 से 50 डिग्री में छह घंटों तक हवा में उड़ने की क्षमता रखता है।
इस तकनीक को लेकर कंपनी और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के बीच बात चल रही है। इसमें कैमरे लगे हैं और जीपीएस सिस्टम भी है, जिससे यह सुरक्षा मामले में भी मदद कर सकता है। यह मौसम के अनुकूल कार्य करता है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसे चार्ज करने में तीन घंटे लगते हैं। इसकी बैटरी को आसानी से निकालकर दूसरी बैटरी लगाकर फिर से संचालित किया जा सकता है। इसके माध्यम से सैनिकों तक कम समय में संसाधन पहुंचा सकते हैं। वह बताते हैं कि यह तीन ट्रायल में पास हो गया है और चौथे चरण में है। यह दुर्गम पहाड़ियों में सेना की ताकत बनेगा।
नष्ट किए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पहुंचाएंगे अपराधियों को जेल
जुर्म करने के बाद अगर कोई अपराधी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिटाने की कोशिश करता है तो उसका भी पुलिस के शिकंजे से बचना मुश्किल होगा। फरीदाबाद में सॉफ्टवेयर बनाने वाली निजी कंपनी ने पीसी नाम से एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया है, जोकि अपराधियों द्वारा घटना को अंजाम देने के बाद नष्ट किए गए फोन, लैपटॉप व किसी भी इलेक्ट्रॉनिक सामान से डाटा वापस रिकवर कर सकेगा। पुलिस के अलावा सुरक्षा एजेंसियों को भी इस सॉफ्टवेयर से खासी मदद मिलेगी। फिलहाल दिल्ली पुलिस इस कंपनी के संपर्क में है और सॉफ्टवेयर को ट्रायल बेस लेनी की बात की जा रही है। दिल्ली पुलिस सूत्रों का कहना है कि जल्द ही इस प्रक्रिया को अमलीजामा पहना दिया जाएगा। इससे शातिर अपराधियों में अंकुश लगेगा। वहीं, साइबर अपराधियों पर भी नकेल कसी जा सकेगी। सॉफ्टवेयर से अपराधियों द्वारा नष्ट किए गए इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज भी सामने आ सकेंगे।
कुछ ही घंटों में दे देगा परिणाम
सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि देखने में आया है कि समय के साथ अपराधी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सबसे पहले नष्ट करने की कोशिश करते हैं। वह साक्ष्य को तोड़ देते हैं या फिर उसे पानी में फेंक देते हैं। यही नहीं कई अपराधी डाटा ही डिलीट कर देते हैं। इसके चलते कई बार साक्ष्य नहीं मिलने से वह बच जाते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए यह सॉफ्टवेयर बनाया गया है। यह इतना तेज है कि कुछ ही घंटों में परिणाम दे देता है।
डूबे लोगों का पता लगाएगी सोनार मशीन
किसी दुर्घटना में पानी में डूबे लोगों को अब आसानी से खोजा जा सकता है। इसके लिए सोनार हेंडी मशीन को स्वदेशी कंपनी ने निर्मित किया है। इनमें से सोनार आधारित उपकरण पानी के अंदर 50 मीटर तक फंसे किसी भी इंसान का पता लगाया जा सकता है। इससे गोताखोरों का समय बचेगा और प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी। पानी की सतह पर रखकर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इस उपकरण को खरीदने के लिए एनडीआरएफ से बात चल रही है।
अमर उजाला
