नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव के लिए दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच गठबंधन पर बुधवार की शाम जो बयानबाजी शुरू हुई, उस पर प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने डैमेज कंट्रोल तो कर लिया। लेकिन, दोनों पार्टियां साथ आएंगी या नहीं इस पर अभी भी संशय बना हुआ है। प्रदेश कांग्रेस नेताओं का कहना है कि हालात को देखते हुए गठबंधन से इनकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन यह आने वाले मध्यप्रदेश और राजस्थान के विधानसभा चुनाव पर निर्भर करेगा। खासकर मध्यप्रदेश में आम आदमी पार्टी की रणनीति कैसी रहती है, इस पर गठबंधन का भविष्य टिका है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक
बुधवार को केंद्रीय नेतृत्व के साथ प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर चर्चा हुई और चर्चा में सातों सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करने को कहा गया। बैठक में शामिल एक नेता ने कहा कि जिस बैठक में 40 से 42 नेता शामिल हों, क्या ऐसी बैठक में गठबंधन की चर्चा होगी? ऐसा कभी किसी भी पार्टी में नहीं होता है। गठबंधन जैसे गंभीर मुद्दे पर केंद्रीय नेतृत्व को फैसला लेना होता है।
उदयपुर एजेंडे पर होगा काम
एक अन्य नेता ने बताया कि लगभग तीन घंटे मीटिंग चली और राष्ट्रीय अध्यक्ष ने संगठन को बेहतर करने को लेकर सबके सुझाव मांगे। सभी को दो से तीन मिनट अपनी राय रखने का समय दिया गया। इस दौरान उदयपुर में हुई बैठक के अनुसार तय किए गए एजेंडे पर काम करने का फैसला हुआ। जिसके तहत दिल्ली के सभी ब्लॉक के अंदर दो मंडलम बनाने हैं। औसतन एक ब्लॉक में 40 से 50 बूथ होते हैं। इस तरह 20 से 25 बूथ एक ब्लॉक में होता है। एक ब्लॉक में दो मंडलम, इसके नीचे सेक्टर अध्यक्ष और इसके नीचे हर बूथ पर एक प्रेजिडेंट बनाने का स्ट्रक्चर तय हुआ है, जिसे एक महीने में बनाना है।
आप के साथ गठबंधन पर बात नहीं
उन्होंने कहा कि पार्टी को मजबूत करने, एक साथ मिलकर काम करने, अपनी-अपनी भागीदारी को पूरा करने के मेसेज के साथ मीटिंग खत्म हुई। पूरी बैठक में कहीं पर भी आप के साथ गठबंधन पर बात नहीं हुई थी। लेकिन नेताओं का कहना है कि आप के साथ कांग्रेस ने पिछले साल भी ऐसा ही प्रयास किया था, लेकिन आप ने ऐसा पेच फंसाया कि उन्हें दिल्ली के साथ-साथ पंजाब और हरियाणा में भी गठबंधन चाहिए, जिस पर बात नहीं बन पाई। इसलिए अभी से गठबंधन पर कयास लगाना जल्दबाजी होगा।
