राजनीति की पहली पाठशाला कहे जाने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव (डूसू चुनाव) के लिए कैंपस का माहौल चुनावी रंग में रंगना शुरू हो गया है। तीन साल बाद होने जा रहे डूसू चुनाव में ताल ठोंकने के लिए छात्र संगठनों ने कमर कस ली है। छात्रसंघ चुनाव की तारीख अब तक घोषित नहीं हुई है, लेकिन छात्र संगठनों ने चुनाव को लेकर कवायद शुरू कर दी है। अगले सप्ताह से संगठन नए छात्रों को साधने के लिए सदस्यता अभियान शुरु करने जा रहे हैं। नए छात्रों के बीच जाकर उनका जोर संगठन की उपलब्धियां बताने पर होगा।
राष्ट्रीय राजनीत की प्राथमिक पाठशाला कहे जाने वाले इन चुनावों से निकल कर कई नेताओं ने राष्ट्रीय राजनीति में मुकाम हासिल किया है। इन चुनावों का महत्व इसलिए भी इस बार बढ़ा हुआ है क्योंकि कोरोना महामारी के कारण वर्ष 2020, 2021, 2022 में चुनाव नहीं हुए थे। तीन साल बाद होने जा रहे चुनाव के लिए संगठन जोर-शोर से तैयारी कर रहे हैं। कैंपस की वॉल ऑफ डेमोक्रेसी (पोस्टर चिपकाने वाली दीवारें) पूरी तरह से पोस्टरों से पटी पड़ी है। डूसू चुनाव को लेकर अब तक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। अधिसूचना जारी होते ही आचार संहिता लागू हो जाएगी। माना जा रहा है कि सितंबर के पहले सप्ताह में चुनाव हो सकते हैं।
छात्रों को साधने में जुटे संगठनों के नेता
चुनाव तिथियों की घोषणा होने से पहले ही छात्र संगठनों ने गतिविधियों को लेकर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। चुनावी समर में मुख्य रूप से दो प्रतिद्वंद्वी एबीवीपी व एनएसयूआई ही हैं। एबीवीपी के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक आशुतोष ने बताया कि हमने अभी संगठन आधारित गतिविधियां शुरू की हैं। कॉलेजों की यूनिट के माध्यम से नए छात्रों से संपर्क साध रहे हैं। सोमवार (21 अगस्त) से डूसू इन कैंपस अभियान शुरु करने जा रहे हैं।
इसमें हमारे 2019 से अब तक डूसू के पदों पर बने हुए तीनों पदाधिकारी (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व संयुक्त सचिव) कॉलेजों में जाकर संगठन व अपनी उपलब्धियों को बताएंगे। इसमें एबीवीपी क्या है, स्टूडेंट यूनियन क्या है, इसके क्या काम है, इसे भी बताया जाएगा। अगस्त के आखिरी सप्ताह में छात्रों की सदस्यता का अभियान शुरु कर रहे हैं। एनएसयूआई दिल्ली अध्यक्ष कुणाल सेहरावत ने बताया कि सोमवार से कॉलेजों में नए छात्रों के साथ सदस्यता अभियान शुरु कर रहे हैं। हमारा इस बात पर जोर है कि कम से कम 70 फीसदी सदस्य बनाए जा सकें। ऑनलाइन के जमाने में छात्र नहीं चाहते हैं कि पेपर-होर्डिंग वाले चुनाव हो, ऐसे में हमारा जोर इस बार पेपर लैस चुनाव पर ही रहेगा। चुनाव तिथियों की घोषणा होते ही ज्यादा सक्रिय हो जाएंगे। अभी प्रचार पर ज्यादा फोकस नहीं किया है।
