बिलाईगढ़ (वीएनएस)। भीम रेजीमेंट के पदाधिकारी और ग्रामीणों ने नालें में पुल निर्माण करने की मांग को लेकर जल सत्याग्रह आंदोलन किया। जहां ग्रामीणों ने नालें के पानी में घंटो खड़ा रहकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बिलाईगढ़ विधानसभा के अंतर्गत ग्राम ठाकुरदिया और धाराशिव के बीच स्थित नाला में पुल निर्माण को लेकर भीमरेजीमेंट के पदाधिकारी मनीष चेलक ने जल सत्याग्रह किया। जहां मनीष चेलक ठाकुरदिया व आसपास के ग्रामीणों के साथ मिलकर नाला के अंदर पानी में घंटो बैठ पुल निर्माण की माँग करते मुर्दाबाद के नारे लगाये।
वहीं जल सत्याग्रह में बैठे मनीष चेलक ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहाकि आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी इस गांव के नाले में पुल निर्माण नहीं हुआ है। पिछले कई वर्षों से यहां के ग्रामीणों द्वारा जनप्रतिनिधियों को अनेको बार आवेदन दिया गया बावजूद अब तक ग्रामीणों की मांग पर केवल आश्वासन ही मिला। उन्होंने आगे कहाकि जल सत्याग्रह मैं दो दिनों से कर रहा हूँ लेकिन अब तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी से किसी प्रकार का कोई ठोस आश्वाशन नहीं मिला है और ना ही कोई जनप्रतिनिधियों से आश्वासन मिला है। चुनाव के समय क्षेत्र के जनप्रतिनिधि आते है और बड़ा-बड़ा वादा करके चले जाते हैं जिसके बाद उन्हें सांप सूंघ जाता है।
इधर जलसत्याग्रह में शामिल होने आए ग्रामीणों की मानें तो सभी इस जल सत्याग्रह का समर्थन कर रहें है और मांग कर रहें हैं कि जल्द से जल्द इस पुल का निर्माण किया जाए. नहीं तो आगे कई बड़े आंदोलन करेंगे जरूरत पड़ने पर रोड़ जाम भी करेंगे। वहीं ग्रामीणों ने आगे बताया कि छत्तीसगढ़ के प्रथम मंत्री अजित जोगी जी द्वारा भी यहाँ पुल निर्माण करने की बात कही थी किंतु आज पर्यन्त तक नही बन पाया। साथ ही कई पार्टियों की सत्ता सरकार आई सभी ने इन ग्रामीणों को पुल निर्माण करने के आश्वाशन के सिवाय कुछ नहीं दिया। वर्तमान में काँग्रेस की सरकार है और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी सरकार के ही विधायक है उनको भी अवगत कराकर पुल निर्माण करने का मांग किया गया है. बावजूद अब तक पुल निर्माण नहीं किया गया । ग्रामीणों ने और आगे कहाकि आसपास के अनेक गांव के लोग और हम लोंग इसी मार्ग से ही आवागमन करते है। क्योंकि बिलाईगढ़ मुख्यालय जाने में काफी नजदीक पड़ता है।
साथ ही सभी स्कूली बच्चों को भी इसी मार्ग से ही आवागमन करना पड़ता हैं। हम सब यह माँग करते हैं कि जल्द से जल्द इस नालें में पुल निर्माण किया जाये। नहीं तो आने वाले समय में जरूरत पडी तो उग्र आंदोलन करेंगे।।
ऐसे में अब देखना होगा की इस जलसत्याग्रह आंदोलन का शासन-प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को कितना फर्क पड़ता है और कब तक ग्रामीणों की मांग पर पुल निर्माण करते हैं।
