मुंबई : शिवसेना में बगावत के बाद से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे गुट की तरफ से एक दूसरे के विधायकों को अपात्र करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दायर की गई याचिकाओं पर सोमवार को विधानभवन के सेंट्रल हॉल में सुनवाई हुई। दोनों तरफ के वकीलों ने सुनवाई के दौरान जोरदार बहस की। दोनों तरफ के वकीलों की जिरह सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को रखी है। विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से इस मामले में ठाकरे गुट के 14 और शिंदे गुट के 39 विधायकों को नोटिस जारी किए गए हैं। सोमवार को हुई सुनवाई में ठाकरे गुट के वकील देवदत्त कामत ने सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई शुरू करने की मांग की, वहीं शिंदे गुट ने इसका विरोध किया। सुनवाई खत्म होने के बाद शिंदे गुट के वकील अनिल साखरे ने कहा,’विधानसभा अध्यक्ष ने हमारी दलीलें सुनीं, हम उनके समक्ष दाखिल सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़ने का विरोध कर रहे हैं। हमारी मांग है कि याचिकाओं पर अलग-अलग सुनवाई हो।’ वकील साखरे ने यह भी बताया कि आज कोई आधिकारिक सुनवाई नहीं हुई और केवल प्रक्रियात्मक हिस्से के बारे में फैसला किया गया।
‘सारे दस्तावेज हैं, तो देर क्यों’
ठाकरे गुट की तरफ से सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई पर जोर देते हुए कहा गया कि सभी याचिकाएं एक ही तरह की हैं। दोनों तरफ से दस्तावेजों का आदान-प्रदान हो चुका है। विधानसभा अध्यक्ष के पास दोनों तरफ के दस्तावेज मौजूद हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कॉपी भी मौजूद है। इसीलिए इस मामले में ज्यादा देर न लगाते हुए त्वरित फैसले के लिए सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की जानी चाहिए।
‘हम पर शेड्यूल 10 लागू नहीं’
विधायकों की अपात्रता के मामले में शेड्यूल 10 के तहत सुनवाई का विरोध करते हुए शिंदे गुट के वकील साखरे ने कहा कि चुनाव आयोग का फैसला हमारे पक्ष में आया है। शिंदे गुट को असली शिवसेना मानकर ही चुनाव आयोग ने पार्टी और चुनाव चिह्न हमें दिया है। इसीलिए हमें अपात्र करने का नोटिस कैसे दिया जा सकता है। हम पर तो शेड्यूल 10 यानी दल-बदल प्रतिबंध कानून लागू ही नहीं होता।
