पालनपुर, 04 अक्टूबर। बनासकांठा जिले की दांता तहसील स्थित शक्तिपीठ अंबाजी में प्रसाद विवाद मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। अंबाजी में प्रसाद बनाने वाली फर्म मोहिनी कैटरर्स का ठेका 30 सितम्बर को ख़त्म हो गया है, इसलिए फर्म का ठेका रिन्यू नहीं किया गया है। बाद में जांच-पड़ताल कर किसी अन्य फर्म को यह काम सौंपा जाएगा। तब तक मंदिर के कर्मचारी और रसोइया ही प्रसाद बनाएंगे।
मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और बनासकांठा जिले के कलक्टर वरुण वर्णवाल ने बताया कि इस साल 23 से 29 सितम्बर तक अंबाजी में होने वाले भादरवी पूनम मेला को लेकर मंदिर में बनाए जा रहे प्रसाद के घी की जांच की गई थी। इसके लिए 28 अगस्त को घी का सैम्पल लिया गया था। सैम्पल की रिपोर्ट 15 सितम्बर को आई, जिसमें यह फेल बताया गया। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 180 डिब्बा घी जब्त किया था। साथ ही भादरवी पूनम मेला से पूर्व मंदिर में उपयोग के लिए बनास डेयरी से शुद्ध घी मंगवाया गया और प्रसाद में इस्तेमाल किया गया।
भादरवी पूनम मेला के दौरान करीब 45 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने माताजी के दर्शन किये और प्रसाद खरीदा था। मंदिर में मिलावटी घी से बने प्रसाद बेचे जाने की आशंका पैदा होने के बाद विवाद और बढ़ गया। इस पर मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष वर्णवाल ने बताया कि अंबाजी में प्रसाद बनाने वाली फर्म मोहिनी कैटरर्स का ठेका 30 सितम्बर को ख़त्म हो गया है, इसके बाद फर्म का ठेका रिन्यू नहीं किया गया है। जब तक नई एजेंसी को काम नहीं सौंपा जाता, तब तक मंदिर के कर्मचारी और रसोइया की ओर से मोहनथाल का प्रसाद बनाया जाएगा।
दूसरी ओर, मोहिनी कैटरर्स का कहना है कि मेला से पहले 15-15 किलो के 300 डिब्बा घी अहमदाबाद के माधुपुरा नीलकंठ टेडर्स से ई-वे बिल से मंगवाया था। इसमें से 120 डिब्बा घी का इस्तेमाल पहले ही कर लिया था। प्रशासन की टीम ने मंगलवार देर रात यहां छापेमारी कर 3 टीन घी जब्त किया। नीलकंड ट्रेडर्स का मालिक अभी फरार बताया जा रहा है। अंबाजी में प्रसाद बनाने वाले फर्म मोहिनी केटरर्स के मालिक के विरुद्ध अंबाजी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
