मुंबई, । फ्रांस की एविएशन कंपनी दासौ नौसेना और वायु सेना के आर्डरों को देखते हुए भारत में ही राफेल असेंबली लाइन स्थापित करने की योजना बना रही है। सूत्रों का कहना है कि भारत जल्द ही मूल उपकरण निर्माता बने बिना चौथी व पांचवीं पीढ़ी के बीच के लड़ाकू विमान बनाने वाला पहला देश बन सकता है।
दासौ के पास वर्तमान में करीब 200 राफेल का बैकलाग है। इसमें संयुक्त अरब अमीरात के लिए 80, इंडोनेशिया के लिए 42, क्रोएशिया के लिए 12, मिस्र के लिए 54, ग्रीस के लिए 24, कतर के लिए 36 विमानों के मौजूदा आर्डर की डिलीवरी शामिल है।
भारत एक बड़ा बाजार है। वायुसेना 114 लड़ाकू विमान खरीदने पर विचार कर रही है। यह दुनिया में कहीं भी लड़ाकू विमानों के लिए सबसे बड़े आर्डरों में से एक होगा। 26 विमानों के लिए नौसेना के आर्डर को भी अगले छह माह के भीतर अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है और इसकी डिलीवरी 2027 में शुरू होनी है। सूत्रों ने कहा, मिहान एसईजेड नागपुर में डीआरएएल की राफेल असेंबली लाइन में इसका उत्पादन 2028 में शुरू होगा। यहां प्रतिवर्ष 24 विमान बनाने की योजना है।
2028 में प्रति विमान 1,000 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत पर यह प्रति वर्ष 24,000 करोड़ रुपये की बिक्री में तब्दील हो जाएगी। इसके लिए करीब 3,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की आवश्यकता होगी। रोजगार के अवसरों के संदर्भ में फाल्कन 2000 के लिए अंतिम असेंबली लाइन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डीआरएएल के पास 600 से अधिक कर्मचारी होंगे। राफेल के साथ यह संख्या 1,200 के पार जा सकती है।इस बीच, दासौ एविएशन के अध्यक्ष और सीईओ एरिक ट्रैपियर 26 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए भारतीय नौसेना के आर्डर को लेकर बातचीत करने के लिए सोमवार को दिल्ली पहुंचेंगे। उनके पीएमओ और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, विदेश मंत्री एस जयशंकर, एनएसए अजीत डोभाल, रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने, नौसेना प्रमुख आर. हरि कुमार और वायु सेना प्रमुख वी.आर. चौधरी से मिलने की संभावना है।
