26 साल बीत जाने के बाद भी दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर दिल्ली के उपराज्यपाल ने गंभीर आपत्ति जाहिर की है। शुक्रवार को दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने अधिकारियों के साथ इन क्षेत्रों की समीक्षा की।
कोर्ट के आदेश पर उद्योग विभाग के डीएसआईआईडीसी ने पुनर्वास योजना शुरू की। योजना के तहत दिल्ली के गैर-अनुरूप व आवासीय क्षेत्रों में चल रहे उद्योगों को वैकल्पिक औद्योगिक भूखंड आवंटित किए गए। योजना के तहत कुल 51,837 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 27,985 इकाइयां औद्योगिक भूखंडों के आवंटन के लिए पात्र पाई गईं। इस योजना के तहत आवंटन 1999-2000 में शुरू हुआ और 2010 में पूरा हुआ। बावजूद इसके इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, सीवर लाइन, पानी और परिवहन सहित अन्य सुविधाएं नहीं है। वहीं बवाना और भोरगढ़ में पुनर्वास योजना क्षेत्रों से नदारद हैं।
बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने दिल्ली के मुख्य सचिव, एसीएस (उद्योग), एमडी (डीएसआईआईडीसी), बिजली विभाग और डीजेबी के प्रतिनिधियों सहित अन्य को फटकार लगाते हुए विभागों व एजेंसियों की निष्क्रियता पर आश्चर्य व्यक्त किया। साथ ही कहा कि उन सभी अधिकारियों की सूची तैयार की जाए जिन्होंने इस अवधि के दौरान सेवा दे दी। साथ ही इनकी जिम्मेदारी तय कर कड़ी कार्रवाई की जाए। इस निष्क्रियता के कारण दिल्ली में अवैध औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुईं जो दिल्ली की हवा को प्रदूषित कर रही हैं।
योजना के तहत कुल 21,759 आवंटन किए गए हैं, जिनमें से 21,458 (98.61%) आवंटियों ने प्लॉट-फ्लैट की लागत का 100 प्रतिशत पहले ही जमा कर दिया है। इन आवंटनों में से अधिकांश 15,838 वैकल्पिक प्लॉट केवल बवाना में दिए गए हैं, इसके बाद बवाना-2 (भोरगढ़) में 3917 और नरेला में 1467 प्लॉट दिए गए हैं। इसके अलावा क्षेत्र में बिजली लाइन, पांच ट्यूबवेल पास होने के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ। इसके अलावा इन 308 मामलों में आवंटियों ने भूखंडों की पूरी कीमत जमा कर दिए जाने के बाद भी कब्जा अभी भी लंबित है। इनपर भी उपराज्यपाल ने नाराजगी जाहिर की।
200 इकाइयां चालू
बैठक के दौरान एलजी को बताया कि कुल 21,759 भूखंडों के आवंटन में से 200 इकाइयां ही चालू है। इनमें भी सुविधाओं के अभाव के कारण लोग परेशान हैं। वहीं, अन्य 300 इकाइयों में भी निर्माण का काम चल रहा है। इन क्षेत्रों के व्यापारियों ने बताया कि दो दशकों के बाद भी सड़क, बिजली, सीवर लाइन, पानी और परिवहन जैसी सबसे बुनियादी सुविधाएं गायब हैं।
नहीं बन पाए रोजगार के नए अवसर
क्षेत्र में सुविधाओं के अभाव के कारण आर्थिक गतिविधियों को नुकसान होने के साथ रोजगार के अवसर भी घटे हैं। उत्तर-पश्चिम दिल्ली में नरेला, बवाना और भोरगढ़ क्षेत्र के लिए समग्र विकास योजना को धक्का लगा है।
