मुंबई : ‘पूर्व आईपीएस अधिकारी मीरा बोरवणकर ने अपनी किताब ‘मैडम कमिश्नर’ में जो आरोप लगाए हैं, उनका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है।’, मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने यह सफाई दी। पवार ने कहा, ‘तीन-चार दिन से मेरे खिलाफ मीडिया में खबरें आ रही हैं। मैं कई बरस पालक मंत्री रहा हूं, लेकिन इस प्रकरण से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। मैंने कभी भी कानून के दायरे से बाहर जाकर कोई काम नहीं किया। अगर मैं किसी का काम नहीं कर सकता, तो सीधे मुंह पर मना कर देता हूं। गलत काम कभी नहीं करता। मैं उस वक्त पालक मंत्री जरूर था, लेकिन मैंने बोरवणकर को कोई आदेश नहीं दिए थे। मैं कभी भी गलत काम के लिए किसी अधिकारी पर कोई दबाव नहीं डालता।’ अजित ने कहा कि जिस जमीन के बारे में आरोप लगाए जा रहे हैं, 2008 में राज्य सरकार ने जीआर निकाला था। वह प्रस्ताव गृह मंत्रालय का था। उस वक्त आर.आर. पाटील गृह मंत्री थे। उन्होंने कहा, ‘मैं भला, मेरा काम भला; यह मेरा स्वभाव है, इसलिए मैं इन आरोपों को महत्व नहीं देता। रिटायर्ड पुलिस अधिकारी ने जो आरोप लगाए हैं, उससे संबंधित सारे दस्तावेज मैंने फिर से चेक किए हैं। मेरा कहीं भी कोई संबंध नहीं है।’
कंपनी का नाम ईडी केस में था
अजित पवार ने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि उनकी वजह से जमीन प्राइवेट बिल्डर के हाथ में जाने से बच गई, लेकिन यह सच नहीं है। दरअसल, जिस कंपनी को जमीन देने का फैसला हुआ था, उस कंपनी का नाम ईडी के एक केस में आने के बाद सरकार ने ही पहले लिए गए फैसले को रद्द किया था। किसी व्यक्ति के कारण यह फैसला रद्द करना पड़ा, यह कहना गलत है। पुणे के येरवडा की पुलिस विभाग की जिस जमीन का जिक्र हो रहा है, वह आज भी पुलिस विभाग के पास ही है।
