मराठा आरक्षण की मांग लेकर मनोज जरांगे पाटिल द्वारा फिर से अनशन शुरू करने से महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल एक बार फिर बढ़ गई है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एवं उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सलाह-मशविरे के लिए दिल्ली जाना पड़ा है।
पिछले महीने भी किया था अनशन
मनोज जरांगे पाटिल मराठा आरक्षण की मांग करते हुए सितंबर में भी अनशन पर बैठे थे। तब 14 सितंबर को स्वयं मुख्यमंत्री शिंदे ने जालना के अंतरवाली सराटी गांव जाकर उनका अनशन तुड़वाया था। शिंदे ने तब उन्हें आश्वासन दिया था कि एक माह में वह मराठा समाज को आरक्षण देने के लिए कोई न कोई रास्ता निकाल लेंगे, लेकिन जरांगे पाटिल ने उन्हें 40 दिन का समय दिया था। 40 दिन बीतने के बाद भी मराठा आरक्षण पर कोई हल निकलते देख बुधवार से जरांगे ने अंतरवाली सराटी गांव में ही फिर से अपना आमरण अनशन शुरू कर दिया है।
निर्णायक फैसले तक जारी रहेगा अनशन
जरांगे का कहना है कि अब वह मराठा आरक्षण पर कोई निर्णायक फैसला आने तक अनशन नहीं खत्म करेंगे। जरांगे के अनशन शुरू करते ही राज्य में राजनीतिक हलचल भी बढ़ गई है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एवं उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दिल्ली रवाना हो गए हैं। उनकी अचानक दिल्ली यात्रा के बारे में उप मुख्यमंत्री अजीत पवार से जब पूछा गया, तो उनका उत्तर था कि उन्हें इन दोनों नेताओं के दिल्ली दौरे की कोई जानकारी नहीं है, लेकिन, अजीत पवार की ही पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल पटेल से जब पत्रकारों ने बात की तो उन्होंने कहा कि संभवत: दोनों नेता मराठा आरक्षण के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात करने के लिए दिल्ली गए होंगे।
तुरंत दे सकते हैं आरक्षण: प्रफुल पटेल
पटेल ने कहा कि मुद्दा ये नहीं है कि मराठा समाज को आरक्षण तुरंत दे सकते हैं या नहीं। तुरंत दे सकते हैं। महत्वपूर्ण बात ये है कि यह कोर्ट में टिकना चाहिए। इसलिए सामान्य बात है कि इसका हल निकालने के लिए ही मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री दिल्ली गए होंगे।दूसरी ओर मनोज जरांगे पाटिल ने अनशन पर बैठने के बाद बुधवार शाम को मीडिया से बात करते हुए कहा कि मराठा आरक्षण का मुद्दा अत्यंत सामान्य था, लेकिन राजनीतिक दलों ने इसे जटिल बना दिया है। यदि राज्य सरकार ने मराठा आरक्षण के विषय को जल्द नहीं सुलझाया तो उनके लिए मुश्किल खड़ी होगी।
