जांजगीर- चांपा । वर्ष 2013 में भाजपा सरकार द्वारा किसानों को समर्थन मूल्य पर बेचे गए धान पर प्रति क्विंटल तीन सौ रूपये के हिसाब से बोनस देने का वादा घोषणा पत्र में किया गया था मगर तत्कालीन भाजपा सरकार ने किसानों का वर्ष 2014-15 और 2015-16 का बोनस नहीं दिया । इसके पहले सरकार बनते ही वर्ष 2013-14 का बोनस दिया गया था और 2016-17 का बोनस दिया गया था। किसानों को अब 2 अरब 80 करोड़ 71 लाख रूपए बोनस मिलेगा।
अविभाजित जांजगीर-चांपा जिले में किसानों को दो साल का बोनस 2 अरब 80 करोड़ 71 लाख रूपए दिया जाना है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती 25 दिसंबर सुशासन दिवस के दिन यह राशि किसानों के खाते में आएगी। तत्कालीन भाजपा सरकार ने किसानों को वर्ष 2013 में पहले वर्ष बोनस दिया इसके बाद दूसरे, तीसरे साल 2014-15 और 2015-16 का बोनस 3 सौ रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से दिया जाना था मगर यह बोनस नहीं दिया गया जबकि वर्ष 2016-17 का बोनस दिया गया था । दो वर्ष का बोनस किसानों को नहीं मिला था। कही न कही इसको लेकर किसानों में नाराजगी थी। वर्ष 2018 में कांग्रेस सरकार ने धान का मूल्य 25 सौ रूपए प्रति क्विंटल कर दिया और घोषणा पत्र में भाजपा के समय के बकाया दो साल को बोनस देने की बात भी कही गई थी मगर 5 साल में कांग्रेस सरकार भी यह बोनस किसानों को नहीं दे सकी। इस बार भाजपा ने अपनी पुरानी गलती सुधारते हुए दो साल का बकाया बोनस देने की बात अपने घोषणा पत्र में कही। अब यहां भाजपा अच्छी खासी बहुमत से सरकार बना चुकी है ऐसे में किसानों में उत्साह है कि उनके खाते में दो साल का बकाया बोनस 25 दिसंबर को जमा हो जाएगा। सहकारिता विभाग के अधिकारी भी अब पुरानी फाइल खंगाल रहे हैं और किस किसान के खाते में कितना बोनस जाएगा इसके लिए गुणा भाग में जुट गए हैं। जानकारी के अनुसार वर्ष 2014-15 में धान बेचने वाले अविभाजित जांजगीर-चांपा जिले के 99 हजार 722 किसानों को 1 अरब 89 करोड़ 45 लाख रूपए का बोनस दिया जाएगा। इसी तरह वर्ष 2015-16 में धान बेचने वाले 1 लाख 7 हजार 848 किसानों को 1 अरब 91 करोड़ 26 लाख रूपए का बोनस मिलेगा। इसके लिए प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। 25 दिसंबर सुशासन दिवस के दिन यह राशि किसानों के खाते में आ जाएगी।
दो साल का बकाया बोनस सात साल बाद किसानों के खाते में डाले जाने से यह समस्या आएगी कि इस अवधि में कई किसानों की मृत्यु हो गई है वहीं कई खाते विभाजित हो गए हैं। इसके अलावा कुछ किसानों ने अपनी जमीन भी बेच दी है और उनका बैंक खाता बंद हो गया है ऐसे किसानों के बोनस की राशि संबंधित किसानों या उनके वैध वारिसों को देने के लिए सहकारी बैंक के अधिकारी कर्मचारियों को मशक्कत करनी होगी।
कर्ज से कम है बोनस की राशि
दो साल का बकाया बोनस 2 अरब 80 करोड़ 71 लाख रूपए अविभाजित जांजगीर-चांपा जिले के किसानों को मिलना है। अब सक्ती जिला अलग बन गया है और दोनों जिले के किसानों का सहकारी बैंकों में कृषि ऋण लगभग 4 करोड़ रूपए है। इस तरह कर्ज और बकाया बोनस की राशि में लगभग 1 करोड़ 20 लाख का ही अंतर है।
