Latest देश प्रेरक प्रसंग अध्याय 25:- मातृभाषा के प्रति प्रेम Lok Swaraj24 March 26, 2024 Spread the love घटना उस वक्त कि है, जब भारत परतंत्र था तथा उस वक्त अंग्रेजों का शासन था | लन्दन के एक छात्रावास में एक भारतीय विद्यार्थी को दिनदर्शिका में कुछ लिखते देख उसके एक आंग्ल सहपाठी ने पूछा,’’यह क्या लिख रहे हो ?’’ ‘’दिनदर्शिका, ‘’उस विधार्थी ने उत्तर दिया | ‘’दिनदर्शिका ? और वह भी अंग्रेजी में ? ‘’इसमें कौन-सी ताज्जुब की बात हुई ? अंग्रेजी जो पढ़ रहा हूँ |’’ ‘’मेरे मित्र, दिनदर्शिका में हम अपना ह्रदय ऊँडेल देते हैं | हमारा दिल खोलने के लिए दिनदर्शिका के आलावा अन्य कोई साधन नहीं और हम अपना दिल अपनी मातृभाषा में ही खोल सकते हैं, न कि किसी विदेशी भाषा में | फिर हिंदी तो हमारी राष्ट्रभाषा है ! हम तुम पर राज कर रहे हैं, इसका यह अर्थ नहीं कि तुम अपनी भाषा छोड़कर हर चीज हमारी भाषा में लिखा करो |’’ बात उस विद्यार्थी को जँच गयी और उसने निश्चय किया कि अब वह न केवल दिनदर्शिका ही हिंदी में लिखा करेगा , वरन यर्थासंभव हिंदी का ही प्रयोग करता रहेगा | वह विद्यार्थी थे महाराष्ट्र के भूतपूर्व राज्यपाल स्व. श्रीप्रकाश | Post navigation Previous 26 जयंती विशेष:-काव्य जगत की “आधुनिक मीरा” महादेवी वर्माNext संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गाजा के लिए संघर्ष विराम प्रस्ताव पारित किया Related Stories सोनम वांगचुक की पत्नी ने सफदरजंग अस्पताल चिकित्सा अधीक्षक को लिखा पत्र, दूसरे अस्पताल ले जाने की मांग FEATURED देश सोनम वांगचुक की पत्नी ने सफदरजंग अस्पताल चिकित्सा अधीक्षक को लिखा पत्र, दूसरे अस्पताल ले जाने की मांग July 18, 2026 प्रधानमंत्री ने विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण के बाद स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापकों से की बात, दी बधाई FEATURED देश प्रधानमंत्री ने विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण के बाद स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापकों से की बात, दी बधाई July 18, 2026 संघ कभी सूर्यास्त नहीं देखता, सदैव चिरयुवा रहता है : प्रो. राकेश सिन्हा FEATURED देश संघ कभी सूर्यास्त नहीं देखता, सदैव चिरयुवा रहता है : प्रो. राकेश सिन्हा July 18, 2026