विशेषज्ञों की राय है कि स्कूलों में बम धमाके की अफवाहों का बच्चों पर उनकी प्रकृति के आधार पर असर पड़ेगा। 10 साल से अधिक उम्र व चंचल है तो खुराफात सोच सकता है। ऐसे बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
स्कूलों में बम की अफवाहों से चंचल बच्चों की चंचलता बढ़ेगी, जबकि शांत बच्चे और सुस्त हो जाएंगे। साथ में उनमें डर भी पैदा होगा। इससे स्कूल जाने से आनाकानी कर सकते हैं। विशेषज्ञों की राय है कि स्कूलों में बम धमाके की अफवाहों का बच्चों पर उनकी प्रकृति के आधार पर असर पड़ेगा। बच्चों की हरकत में उम्र, सोच और व्यवहार के आधार पर अंतर हो सकता है। यदि बच्चा छोटा और शांत हैं तो सहमा या गुमसुम हो सकता है।
वहीं, 10 साल से अधिक उम्र व चंचल है तो खुराफात सोच सकता है। ऐसे बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इन बच्चों पर सख्ती करना बच्चों को बिगाड़ सकता है। यदि बच्चों में कोई खुराफात के लक्षण दिखे तो अभिभावकों को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। साथ ही प्यार और दुलारे से उन्हें समझाना चाहिए। जरूरत के आधार पर मनोरोग विशेषज्ञों से भी सलाह लेनी चाहिए।
जांच से चलेगा पता : डॉ. अंकित
इंदिरा गांधी अस्पताल में मनोरोग विभाग के डॉक्टर अंकित दराल ने कहा कि बच्चों की जांच के बाद ही पता कर सकते हैं कि उसके व्यवहार में अंतर क्यों आया है। अक्सर बच्चे मनोरंजन या कुछ नया करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं।
मस्तिष्क की बनावट के आधार पर करेगा व्यवहार : डॉ. नंद कुमार
एम्स के मनोरोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. नंद कुमार ने कहा कि बम की अफवाहों का असर मस्तिष्क की बनावट के आधार पर बच्चों पर पड़ेगा। बच्चा यदि व्यवहार से शांत है तो वह डर सकता है। वहीं, चंचल है तो उनकी खुराफात बढ़ सकती है। बच्चों की सोच उम्र, व्यवहार व आसपास के वातावरण पर निर्भर करती है। कुछ सालों से बच्चों में बढ़े स्क्रीन टाइम व फोन के इस्तेमाल के कारण खुराफात बढ़ी है।
