देश चाणक्य नीति: ईश्वर प्राथना Lok Swaraj24 May 8, 2024 Spread the love प्रणम्य शिरसा विष्णुं त्रैलोक्याधिपतिं प्रभुम् | नाना शास्त्रोद्धातं वक्ष्ये राजनीति समुच्चयम् | तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) के स्वामी भगवान विष्णु के चरणों में शीष नवाकर प्रणाम करके अनेक शास्त्रों से उद्धृत राजनीति के संकलन का वर्णन करता हूं | चाणक्य यहाँ राजनीति-सम्बन्धी विचारों के प्रतिपादन के समय कार्य के निर्विघ्न समाप्ति के भाव से कहते हैं कि- मैं कौटिल्य सबसे पहले तीनों लोकों के स्वामी भगवान विष्णु को सिर नवाकर प्रणाम करता हूँ | मैंने अनेक शास्त्रों से चुन-चुनकर राजनीति की बातें एकत्रित की हैं | यहाँ मैं इन्हीं का वर्णन करता हूँ | चाणक्य (विष्णुगुप्त) के लिए कौटिल्य का सम्बोधन इनके कूटनीति में प्रवीण होने के कारण प्रयोग किया है | यह एक तथ्य है कि चाणक्य की नीति राजा एवं प्रजा ,दोनों के लिए ही प्रयोग किए जाने के लिए थी | राजा के द्वारा निर्वाह किए जानेवाला प्रजा के प्रति धर्म ही राज धर्म कहा गया है और प्रजा द्वारा राजा अथवा राष्ट्र के प्रति निर्वाह किया गया धर्म ही प्रजा-धर्म कहा गया | इस धर्म का उपदेश ही नीतिवचन के रूप में निर्विघ्न पूर्ण हो इसी आशय से प्रारंभ में मंगलवार के रूप में विष्णु की आराधना से कार्यारम्भ किया गया है| Post navigation Previous 8 मई : दो घटनाओं में चार क्राँतिकारियों का बलिदान दिवसNext एफआईवीबी शुरू करेगा वॉलीबॉल फाउंडेशन Related Stories सोनम वांगचुक की पत्नी ने सफदरजंग अस्पताल चिकित्सा अधीक्षक को लिखा पत्र, दूसरे अस्पताल ले जाने की मांग FEATURED देश सोनम वांगचुक की पत्नी ने सफदरजंग अस्पताल चिकित्सा अधीक्षक को लिखा पत्र, दूसरे अस्पताल ले जाने की मांग July 18, 2026 प्रधानमंत्री ने विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण के बाद स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापकों से की बात, दी बधाई FEATURED देश प्रधानमंत्री ने विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण के बाद स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापकों से की बात, दी बधाई July 18, 2026 संघ कभी सूर्यास्त नहीं देखता, सदैव चिरयुवा रहता है : प्रो. राकेश सिन्हा FEATURED देश संघ कभी सूर्यास्त नहीं देखता, सदैव चिरयुवा रहता है : प्रो. राकेश सिन्हा July 18, 2026