देश चाणक्य नीति :- माता-पिता भी अपना दायित्व समझें Lok Swaraj24 May 15, 2024 Spread the love लालयेत पंचवर्षाणी दशवर्षाणी ताडयेत | प्राप्ते टू षोडशे वर्षे पुत्रं मित्रवदाचरेत || यहाँ आचार्य चाणक्य पुत्र-पालन में माता- पिता के दायित्व को प्रतिपादित करते हुए कहते हैं कि पुत्र का पांच वर्ष तक लालन करे | दस वर्ष तक ताडन करे | सोलहवां वर्ष लग जाने पर उसके साथ मित्र के समान व्यवहार करना चाहिए | आशय यह है कि पंच वर्ष की अवस्था तक ही पुत्र के साथ लाड़-प्यार करना चाहिए | इसके बाद दस वर्षों तक, आर्थात प्रन्द्रह वर्ष की अवस्था तक उसे कठोर अनुशासन में रखना चाहिए | किन्तु जब पुत्र पंद्रह वर्ष की अवस्था पूरी करके सोलहवें में प्रवेश कर जाए, तो वह व्यस्क हो जाता है | फिर उसके साथ एक मित्र की तरह सम्मान का व्यवहार करना चाहिए | Post navigation Previous लगातार तीसरे दिन सस्ता हुआ सोना, चांदी के भाव में तेजीNext वस्तु एवं सेवा कर संग्रहण में वृद्धि से गरीब वर्ग तक सहायता पहुंचाना हुआ आसान Related Stories इतिहास के पन्नों में 20 अप्रैल : क्रूरतम तानाशाह ‘एडोल्फ हिटलर’ का जन्मदिन FEATURED देश इतिहास के पन्नों में 20 अप्रैल : क्रूरतम तानाशाह ‘एडोल्फ हिटलर’ का जन्मदिन April 19, 2026 बजट सत्र के बाद संसद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित; नौ विधेयक पारित, उत्पादकता उच्च बनी हुई है। FEATURED देश बजट सत्र के बाद संसद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित; नौ विधेयक पारित, उत्पादकता उच्च बनी हुई है। April 18, 2026 कैबिनेट ने क्षमता और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 24,815 करोड़ रुपये की रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी FEATURED देश कैबिनेट ने क्षमता और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 24,815 करोड़ रुपये की रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी April 18, 2026