देश चाणक्य नीति :- माता-पिता भी अपना दायित्व समझें Lok Swaraj24 May 15, 2024 Spread the love लालयेत पंचवर्षाणी दशवर्षाणी ताडयेत | प्राप्ते टू षोडशे वर्षे पुत्रं मित्रवदाचरेत || यहाँ आचार्य चाणक्य पुत्र-पालन में माता- पिता के दायित्व को प्रतिपादित करते हुए कहते हैं कि पुत्र का पांच वर्ष तक लालन करे | दस वर्ष तक ताडन करे | सोलहवां वर्ष लग जाने पर उसके साथ मित्र के समान व्यवहार करना चाहिए | आशय यह है कि पंच वर्ष की अवस्था तक ही पुत्र के साथ लाड़-प्यार करना चाहिए | इसके बाद दस वर्षों तक, आर्थात प्रन्द्रह वर्ष की अवस्था तक उसे कठोर अनुशासन में रखना चाहिए | किन्तु जब पुत्र पंद्रह वर्ष की अवस्था पूरी करके सोलहवें में प्रवेश कर जाए, तो वह व्यस्क हो जाता है | फिर उसके साथ एक मित्र की तरह सम्मान का व्यवहार करना चाहिए | Post navigation Previous लगातार तीसरे दिन सस्ता हुआ सोना, चांदी के भाव में तेजीNext वस्तु एवं सेवा कर संग्रहण में वृद्धि से गरीब वर्ग तक सहायता पहुंचाना हुआ आसान Related Stories बिहार एमएलसी चुनाव: स्नातक निर्वाचन में 43.87 और शिक्षक निर्वाचन में 74.55 प्रतिशत मतदान FEATURED देश बिहार एमएलसी चुनाव: स्नातक निर्वाचन में 43.87 और शिक्षक निर्वाचन में 74.55 प्रतिशत मतदान October 23, 2026 श्रीकृष्ण सिंह की जयंती समारोह में शामिल होंगे मल्लिकार्जुन खड़गे FEATURED देश श्रीकृष्ण सिंह की जयंती समारोह में शामिल होंगे मल्लिकार्जुन खड़गे October 23, 2026 वास्तविक ग्रामीण परिवेश से रूबरू होने के लिए मध्य प्रदेश आएं पर्यटक : डॉ. इलैया राजा टी FEATURED देश वास्तविक ग्रामीण परिवेश से रूबरू होने के लिए मध्य प्रदेश आएं पर्यटक : डॉ. इलैया राजा टी October 23, 2026