ग्रामीण इलाके से विभिन्न रूटों के तहत नई दिल्ली इलाके में आने-जाने वाली बसों में पूरा दिन लोकसभा चुनाव के संबंध में चर्चा होती देखी जा रही है। इन बसों में दिल्ली के गांवों के साथ-साथ हरियाणा के गांवों के निवासी भी सफर करते है।
लोकसभा चुनाव में कौन आगे है और कौन पीछे। यह चर्चा आज कल हर जगह चल रही है। इस मामले में राजधानी में चलने वाली बसें भी राजनीति चर्चा से अछूती नहीं है। उनका दृश्य चौपालों जैसा हो चुका है। बसों में बैठी सवारियां अपने लोकसभा क्षेत्र के बारे में ही नहीं, बल्कि दिल्ली व आसपास के राज्यों के साथ देश के राजनीतिक माहौल पर प्रकाश डालती हैं। इस दौरान कुछ लोग एक-दूसरे को वोट देने के संबंध में अपनी राय भी देने का प्रयास कर रहे है। इस तरह आज कल बसें पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगी हुई है।
ग्रामीण इलाके से विभिन्न रूटों के तहत नई दिल्ली इलाके में आने-जाने वाली बसों में पूरा दिन लोकसभा चुनाव के संबंध में चर्चा होती देखी जा रही है। इन बसों में दिल्ली के गांवों के साथ-साथ हरियाणा के गांवों के निवासी भी सफर करते है। वे सफर करने के दौरान केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार की कई योजनाओं पर प्रकाश डालते हैं। उनमें से कई को अच्छा, तो कुछ को खराब बताते है। यही नहीं, वह अपनी बात को सही करार देने के लिए अपने बयानों के संबंध में तर्क भी देते है।
चुनावी मुद्दों में महंगाई का जिक्र हो
बस में यात्रा कर रही एक महिला ने कहा कि चुनावी मुद्दों में महंगाई का भी जिक्र होना चाहिए। दरअसल, मौजूदा समय में घर का खर्चा चलाना आसान नहीं है। इसके बावजूद इस मामले में चुनाव में कोई खास चर्चा नहीं हो रही है। चर्चा के दौरान धीरे-धीरे करीब आधी सवारियां शामिल हो गई। तभी उनके बीच कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर चर्चा आरंभ होनी शुरू हो गई। एक बुजुर्ग ने कहा कि भाई दिल पर हाथ रखकर कहो कि प्रदेश में महिला सुरक्षा पुख्ता है या नहीं। तभी आवाज आई कि ताऊजी यह लोकसभा का चुनाव है, विधानसभा का नहीं। भाई चुनाव कोई सा भी हो। पार्टी तो वही है।
