भारतीय मुद्रा रुपया एक दशक पहले तक एशिया की सबसे अस्थिर मुद्राओं में शुमार किया जाता था। लेकिन, अब रुपया को सबसे स्थिर मुद्राओं में शुमार किया जाने लगा है, जो एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। ये भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, प्रभावी नीतिगत सुधार और विदेशी मुद्रा भंडार के रणनीतिक प्रबंधन को दर्शाता है।
आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि 2010 के दशक की शुरुआत में भारत में महंगाई आसमान छू रही थी, महंगाई दर बढ़कर करीब 10 फीसदी के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। वैश्विक वित्तीय संकट के बीच सरकार द्वारा भारी-भरकम खर्च से स्थिति ज्यादा बदतर हो गई थी। लेकिन वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देश की सत्ता संभालने के बाद अब तक भारत में आर्थिक विकास पहले से काफी बेहतर हुई है। इसके साथ ही भारत ने कई अन्य देशों को पछाड़कर दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यस्था बन गया है, जो अब तीसरी बड़ी अर्थव्यस्था बनने की ओर अग्रसर है।
केंद्र में लगातार तीसरी बार सत्ता में आई नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार द्वारा सुनिश्चित की गई राजनीतिक स्थिरता ने भी विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया है। केंद्र सरकार द्वारा आरबीआई को महंगाई का लक्ष्य तय करने का काम सौंपने और बजट घाटे को कम करने सहित देश में आर्थिक सुधारों को निरंतर लागू करने से भारतीय अर्थव्यवस्था काफी मजबूत हो गई है। पिछले वित्त वर्ष 2023-24 में देश की अर्थव्यवस्था 8 फीसदी की दर से बढ़ी है। वहीं, चालू वित्त वर्ष 2024-25 में आरबीआई ने सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी वृद्धि दर 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, जबकि फिच सहित कई रेटिंग एजेंसियों ने आर्थिक वृद्धि दर 6.8 फीसदी से 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।
