भगवान् विष्णु को समर्पित आषाढ़ माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है| मान्यता है कि इस व्रत को रखने वाले व्यक्ति को हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल प्राप्त होता है और साथ ही अनजाने में हुए गलतियों के उलझनों से भी छुटकारा मिलता है। दृक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की पहली एकादशी तिथि की शुरुआत 1 जुलाई 2024 को सुबह 10 बजकर 26 मिनट पर होगी और अगले दिन यानी 2 जुलाई 2024 को सुबह 8 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए उदयातिथि के अनुसार, 2 जुलाई 2024 को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
एकादशी पूजा नियम
एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
एकादशी के दिन से एक दिन पहले सात्विक भोजन करना चाहिए।
एकादशी से एक दिन पहले अपने नाखून, दाढ़ी और बाल काट लें।
एकादशी के दिन, भूल जाने पर भी चावल नहीं खाना चाहिए, उपवास करना चाहिए और भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।
एकादशी के दिन रात्रि जागरण करना चाहिए, इससे लक्ष्मी नारायण प्रसन्न होंगे। घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
एकादशी में पारण का बहुत ही विशेष महत्व होता है।
एकादशी के अगले दिन, यानी द्वादशी तिथि के दिन सुबह स्नान करके सूर्य देव को जल देना चाहिए और पारण करना चाहिए।
तुलसी के पत्तों को प्रसाद के रूप में ग्रहण करके एकादशी व्रत का पारण करें।
इन मंत्रों का करें जप
विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
विष्णु मंगल मंत्र
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
योगिनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, स्वर्ग लोक में कुबेर नाम का राजा रहता था। वह शिव भक्त था। रोजाना महादेव की पूजा किया करता था। उसका हेम नाम का माली था, जो हर दिन पूजा के लिए फूल लाता था। माली की पत्नी का नाम विशालाक्षी था। वह बेहद सुंदर थी। एक बार जब सुबह माली मानसरोवर से फूल तोड़कर लाया, लेकिन कामासक्त होने की वजह से वह अपनी स्त्री से हास्य-विनोद करने लगा।
राजा को उपासना करने में देरी हो गई, जिसकी वजह से वह क्रोधित हुआ। ऐसे में राजा ने माली को श्राप दे दिया। उन्होंने कहा कि तुमने ईश्वर की भक्ति से ज्यादा कामासक्ति को प्राथमिकता दी है, तुम्हारा स्वर्ग से पतन होगा और तुम धरती पर स्त्री वियोग और कुष्ठ रोग का सामना करोगे। इसके बाद वह धरती पर आ गिरा, जिसकी वजह से उसे कुष्ठ रोग हो गया और उसकी स्त्री भी चली गई। वह कई वर्षों तक धरती पर कष्टों का सामना करता रहा। एक बार माली को मार्कण्डेय ऋषि के दर्शन हुए। उसने अपने जीवन की सभी परेशानियों को बताया।
ऋषि माली को बातों को सुनकर आश्चर्य हुआ। ऐसे में मार्कण्डेय ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी के व्रत के महत्व के बारे में बताया। मार्कण्डेय ने कहा कि इस व्रत को करने से तुम्हारे जीवन के सभी पाप खत्म होंगे और तुम पुनः भगवत कृपा से स्वर्ग लोक को प्राप्त करोगे। माली ने ठीक ऐसा ही किया। भगवान विष्णु ने उसके समस्त पापों को क्षमा करके उसे पुनः स्वर्ग लोक में स्थान प्रदान किया।
