दिल्ली रिज वन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से जुड़े मामले में उपराज्यपाल वीके सक्सेना की ओर से कोर्ट में एक हलफनामा दिया गया है। जिसमें कहा गया हा कि पेड़ों की कटाई शुरू होने के बाद ही उन्हें पेड़ों की कटाई के लिए अदालत की पूर्व अनुमति प्राप्त करने की आवश्यकता के बारे में पता चला।
दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना ने दिल्ली रिज वन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से जुड़े मामले में अपने आचरण का बचाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है। उन्होंने बताया कि पेड़ों की कटाई शुरू होने के बाद ही उन्हें पेड़ों की कटाई के लिए अदालत की पूर्व अनुमति प्राप्त करने की आवश्यकता के बारे में पता चला।
उपराज्यपाल ने स्वीकार किया कि इस साल फरवरी में, उन्होंने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल आयुर्विज्ञान संस्थान तक पहुंच को आसान बनाने के लिए एक सड़क चौड़ीकरण परियोजना के स्थल का दौरा किया था। जब उन्हें बताया गया कि पेड़ों की कटाई के लिए ‘सक्षम प्राधिकारी’ से अनुमति का इंतजार है। एलजी ने कहा है कि उन्हें शीर्ष अदालत से अनुमति की आवश्यकता के बारे में पहली बार 21 मार्च को ही अवगत कराया गया था, जब डीडीए की ओर से विशेषज्ञ समिति के गठन के लिए प्रस्ताव प्राप्त हुआ था।
पेड़ों को गिराने का वास्तविक कार्य 16 फरवरी के आसपास शुरू हो चुका था। उन्होंने कहा है कि शीर्ष न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन करने का उनका कोई इरादा नहीं था और जिस तरह से यह सब हुआ वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण था।
एलजी के हलफनामे में कहा गया है, इस न्यायालय की अनुमति के बिना पेड़ों को गिराने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर उन्हें गहरा खेद है। हालांकि उन्होंने कहा कि ये काम सद्भावनापूर्वक किया गया था। इस संबंध में एलजी ने दिल्ली सरकार की ओर से जारी 14 फरवरी की अधिसूचना का भी हवाला दिया, जिसमें दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 (डीपीटीए) के तहत पेड़ों की कटाई की मंजूरी दी गई थी।
एलजी ने कहा कि फील्ड अधिकारियों ने इसे पेड़ों की कटाई के लिए हरी झंडी समझ लिया। उन्होंने कहा कि फिर भी परियोजना के निष्पादन के लिए जिम्मेदार डीडीए अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है। मजिस्ट्रेट के समक्ष दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत भी दर्ज की गई है।
महत्वपूर्ण योजना के लिए हुई पेड़ों की कटाई
एलजी ने कहा है कि पेड़ों की कटाई एक महत्वपूर्ण परियोजना के लिए थी, जिसमें पहले ही 2200 करोड़ रुपये का सार्वजनिक धन निवेश किया जा चुका है। इसके अलावा उन्होंने स्पष्ट किया कि काटे गए पेड़ों की वास्तविक संख्या लगभग 642 पेड़ है न कि 1100, जैसा कि पहले अदालत को बताया गया था। एलजी ने शीर्ष अदालत से डीडीए के उपाध्यक्ष सुभाषिश पांडा को इस मामले में उनके खिलाफ शुरू की गई अवमानना मामले से मुक्त करने का भी आग्रह किया है। एलजी सक्सेना ने बताया कि जब पेड़ काटे गए, तब पांडा का मेडिकल ऑपरेशन चल रहा था और वे 12 मार्च तक शारीरिक रूप से कार्यालय में वापस नहीं आए। हलफनामे में कहा गया है कि प्रतिपूरक वृक्षारोपण उपाय पहले से ही चल रहे हैं। एलजी ने बताया कि 170 पेड़ और 4000 झाड़ियां पहले ही लगाई जा चुकी हैं। अगले सात दिनों में गौशाला रोड पर 200 पेड़ और 500 और झाड़ियां लगाई जानी हैं।
